मंगलवार, 23 मई 2017

अजूबी शिक्षा व्यवस्था हेतु अजूबे सुझाव (UP PRIMARY EDUCATION)

यूपी में अध्यापको द्वारा, पशुगणना,बालगणना, जनगणना,चुनाव,मिड डे मील,ड्रॉपआउट गणना,
टीकाकरण,कीड़ी की दवा देना,पल्स पोलियो की दवा,आयरन टैबलेट,आधार कार्ड बनवाने,स्कूल रंगवाने,पत्र पहुचाने के बाद जो एक दिन में 42 घंटे शेष बचते हैं उसके लिए अब सरकार ने कुछ नया सोचा है..
●अब गुरु जी स्कूलों में भैंस दूहेंगे.
● दो घंटे झाड़ू लेकर सफाई भी करेंगे..
झाड़ू लेकर कुत्ता बिल्ली गाय भैंस द्वारा किया गोबर, मलमूत्र तो रोज साफ़ ही करते थे गुरु जी अब बाकी भैस दुहना रह गया था.. मगर इसके बाद भी एक दिन में 36 घंटे बच रहे हैं अध्यापक के पास, ये तो सरासर अकर्मण्यता है इसके लिए कुछ अन्य सुझाव जो शिक्षा की गुणवत्ता को ऑक्सफोर्ड के समकक्ष ला के खड़ा कर देंगे..
●अंडा लाभकारी है अतः प्रोटीन की कमी से जूझ रहे बच्चों हेतु मुर्गी पालन भी स्कूल में हो।।और गुरु जी मुर्गी के बच्चे को दाना खिलाएं..मुर्गी किसी अन्य स्कूल के मुर्गे के साथ भाग जाने की स्थिति में गुरु जी पर गैरजमानती धाराओं में FIR दर्ज हो..
●विद्यालय के सामने खाली पड़ी ग्राम सभा आदि की जमीन पर गेंहू,दाल या चावल उगाने की जिम्मेदारी गुरु जी की हो जिससे की मीड डे मील में समस्या न आये..फसल को नीलगाय या मौसम से हुई क्षति को गुरु जी के वेतन से वसूला जाये..
● विद्यालयों में चोरी की घटना को देखते हुए गुरु ज़ी लोग पारी बांधकर रोज रात 8 से सबह 6 तक चौकीदार की ड्यूटी करें..चोरी होने पर सभी गुरु जी लोगों का एक माह का वेतन काटकर प्रधानध्यापक को सस्पेंड किया जाये..
● बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नाव आदि चलवाने, और पानी कम होने पर, प्रोटीन का मुख्य स्रोत मछली को जाल लेकर पकड़ने की जिम्मेदारी उस गांव के अध्यापको की हो..प्रतिदिन हर अध्यापक को कम से कम 4 किलो मछली पकड़ कर मछली और जाल के साथ सेल्फी भेजने का प्रावधान हो..
● बच्चों को नहलाने,उनके कपडे साफ़ करने,शौच आदि साफ़ सफाई का काम क्लासटीचर के जिम्मे हो।किसी लड़के के कपडे गंदे मिले तो अध्यापक का इंक्रीमेंट रोक दिया जाये..
● शिक्षा के निजीकरण माफिया द्वारा "प्रायोजित जनमत" बना के गुरु जी को कोसते रहें की इनको क्या काम है? फ्री का वेतन पा जाते हैं.संभव हो तो महीने में 5% अध्यापकों का निलंबन हो और 15% का इंक्रीमेंट रोका जाये..
पूरा विश्वास है की इस् प्रकार शिक्षा गुणवत्ता के नए शिखर को पा जायेगी और आने वाले दिनों में कान्वेंट और शिशु मंदिर के पंखे और बेंच वाले कमरों में पढ़ने वाले बच्चे अपने स्कूल से नाम कटवाकर, हमारे प्राथमिक स्कूलों के टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ने आएंगे...
Narendra Modi जी MYogiAdityanath जी व्यथित ह्रदय से ये पोस्ट लिख रहा हूँ की अब भी प्राथमिक शिक्षा की मूल समस्याओं को एड्रैस करने की जगह हम भैंस और झाड़ू में उलझे हैं..सिर्फ अध्यापक की जिम्मेदारी तय करने से सिस्टम नहीं सुधरने वाला है..अध्यापक तो फ्रंटलाइन का सिपाही है और उसे जैसा आदेश और परिवेश मिलेगा वैसा करेगा मगर नीति निर्धारण में व्यवहारिकता नहीं आई तो, आज का एक भैंस पालने का सुझाव,जिसे संभवतः शासन रिजेक्ट कर दें, कल के प्राथमिक शिक्षा का भविष्य भी हो सकता है..
आशा है नई सरकार इन बिंदुओं पर भी संज्ञान लेगी..
आशुतोष की कलम से

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