रविवार, 21 मई 2017

जय भीम जय मीम एकता का सच (Truth of Jai Bhim Jai meem)

दो तस्वीरें साझा कर रहा हूँ, दिल्ली के जंतर मंतर पर "भीम सेना" नाम के एक संगठन के प्रदर्शन के सन्दर्भ में..
भीमसेना का कहना है कि उनके असली दुश्मन हिन्दू है.
मुस्लिम और ईसाई समुदाय के साथ उन्हें कोई समस्या नहीं है..अब बात तस्वीरों की..तस्वीर एक: उत्तर प्रदेश के लखनऊ की सन 2012 की जब "जय भीम" के आराध्य "बुद्ध" पर "जय मीम" ने बेलचे और फावड़ों से हमला किया था.और "भीम सेना" शायद किसी बिल में घुसी हुई थी..


तस्वीर दो: बामियान अफगानिस्तान में विश्व की सबसे बड़ी "बुद्ध प्रतिमाएं" थी.
जय मीम ने तोप लगवा कर उड़वा दिया और "भीम सेना" या इसके जैसों की पैंट गीली पीली हो गई किसी की हिम्मत नहीं हुई मुह खोलने की..मुझे नहीं लगता कि हिन्दू समुदाय भारत में कभी इतना अतिवादी हुआ होगा की बुद्ध का ये हाल किया होगा.मगर राजनीति ऐसी घटिया है कि बुद्ध का ये हाल करने वाले अच्छे हैं और बुद्ध पूर्णिमा मनाने वाले असहिष्णु अत्याचारी..
जैसा की मैंने पहले भी कहा है कि Narendra Modi और भाजपा को 2019 में सिर्फ एक ही तरीक़े से हराया जा सकता है वो है हिन्दू समाज में जातीय विद्वेष को भड़काकर.. यूपी के चुनाव परिणाम आते ही ये प्रयास तेज हुआ है और उसी प्रसंग का अवैध परिणाम है "भीम सेना"..इनको भीम से कुछ लेना देना नहीं इनका टारगेट है जातीय भावना को भड़काकर चुनाव की बिसात बिछाना...
कृपया ऐसे आयोजनों से सावधान रहें। याद कीजिये पुरस्कारवापसी, रोहितवेमुला और असहिष्णुता और बिहार चुनाव..अब 2019 से पहले ये "असहिष्णुता पार्ट 2" की तैयारी है. खैर राजनीति में विपक्ष चाले चलने को स्वतंत्र है सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी है इस "असहिष्णुता 2" वाले सामाजिक वायरस का एंटीवायरस ढूंढें...
आशुतोष की कलम से

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