बुधवार, 12 अप्रैल 2017

ट्रिपल तलाक: मौलवियों की कुंठित काम पिपासा को शांत करने का एक साधन

सनातन धर्म में सती प्रथा की परंपरा थी। सती प्रथा एक ऐसी प्रथा थी जिसमें, किसी महिला का पति मर जाता था तो महिला पति के साथ ही उसी चिता में जल जाती थी.संभवतः सतयुग,द्वापर,त्रेता तक, योग दैनिक जीवन का एक हिस्सा था और महिला स्वेच्छा से योग के द्वारा चिता में बैठे-बैठे अपने प्राण त्याग देती थी..ऐसे योग का वर्णन आज भी उपलब्ध है.. मैं स्वेच्छा से चिता में बैठने वाली प्रथा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि जब कलयुग में भी रानी पद्मनी ने हजारों महिलाओं के साथ जौहर किया था,तो न तो समाज ने, ना ही सनातन धर्म ने उन्हें ऐसा करने के लिए बाध्य किया था...युग बदले और कालांतर में स्वेच्छा से चिता में बैठने वाली इस प्रथा ने बहुत ही विभत्स रूप ले लिया। बाल विवाह की व्यवस्था भी कुरीति का रूप ले चुकी थी। एक 8 साल की बच्ची का पति यदि मर जाता था तो उसे सती प्रथा के अनुसार चिता में जलकर मरना होता था, और प्रथा का स्वरूप इतना विकृत हुआ कि यदि महिला की सहमति नहीं हुई तो भी उसे जबरिया जिंदा चिता में डालकर जला दिया जाने लगा। धीरे-धीरे इस प्रथा का विरोध हुआ कानून बनाए गए और यह प्रथा आज खत्म हो गई । क्या इससे हिंदू धर्म समाप्त हो गया या सनातन धर्म पर कोई खतरा आ गया?? ऐसा नहीं हुआ क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने गीता में स्वयं ही कहा है कि "परिवर्तन ही संसार का नियम है। काल समय परिस्थिति के अनुसार हमारी मान्यताएं विचारधाराएं कानून और यहां तक की पूजा पद्धति भी बदलती रही है परंतु इससे परमात्मा के होने की मूल भावना नहीं बदल जाती है...

कुरान में कहीं भी तीन तलाक का जिक्र नहीं..ये तीन तलाक और फिर कुछ केसेज में हलाला प्रथा, सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के शरीर को भोगने की मौलवियों की कुत्सित मानसिकता एवं कुंठित काम पिपासा को शांत करने का एक साधन मात्र है । आज जब पूरे भारत की मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक और हलाला के खिलाफ खड़ी हो गई हैं, तो मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड नाम के एक इश्लामिक ठेकेदारी वाले एनजीओ को, मुसलमान बिरादरी में पिछले 40 से ज्यादा सालों से चली आ रही बादशाहत खत्म होने का खतरा मंडराने लगा है। ज्यादा संभावना है कि कोर्ट या सरकार , मुस्लिम महिलाओं के ऊपर तीन तलाक के माध्यम से किए जा रहे अत्याचार को कानून बनाकर खत्म कर दें । विरोध बढ़ता देख मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड नाम के NGO के उपाध्यक्ष ने यह कहा है कि वह डेढ़ साल में ट्रिपल तलाक को खत्म कर देंगे । जब ट्रिपल तलाक कुरान में लिखा ही नहीं है तो यह डेढ़ साल का वक्त किस लिए?? विश्व की सबसे ज्यादा मुस्लिम जनसंख्या वाला देश इंडोनेशिया या मध्य पूर्व के अनेको मुस्लिम देशों में तीन तलाक की प्रथा को खत्म किया कर दिया गया है, और उन देशों के सामने भारत के मौलाना नाक रगड़ते रखते हैं तो क्या वह सभी देश "कुफ्र" कर रहे हैं ??? यह एक विचारणीय प्रश्न है।
एक छोटे से घरेलू विवाद में किसी महिला का शौहर अमेरिका या सऊदी अरब से बैठे-बैठे WhatsApp पर उसको तलाक तलाक तलाक लिख कर भेज देता है और वह कानूनन मान्य हो जाता है । इसके बाद शौहर का गुस्सा शांत होता है और उसे अफसोस होता है कि यह मैंने क्या कर दिया?? लेकिन ट्रिपल तलाक कानून के अनुसार अब उस लड़की को किसी मौलवी (ज्यादातर केस में ) या किसी अन्य पुरुष के साथ निकाह करना पड़ेगा। यह सांकेतिक नहीं होगा ,वह पुरुष या मौलवी उस स्त्री के साथ संभोग करेगा थोड़ा और स्पष्ट समझा दूँ तो उसके साथ सेक्स करेगा और इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि महिला दूसरे पुरुष से गर्भवती ना हो जाए इसके बाद एक निश्चित समयावधि (इद्दत) के बाद वह पुरुष उस महिला को फिर तलाक दे देगा और पुनः वह महिला अपने पहले पति के साथ रह सकेगी..
इतना वीभत्स, इतना घिनौना व्यवहार क्या कोई भी मुसलमान अपनी बेटी या बहन, जिसे उसने बहुत ही नाजो से पाल पोस कर बड़ा किया है उसके साथ होना पसंद करेगा ??? यदि आप का उत्तर हाँ है तो बेशक आप तीन तलाक का समर्थन कीजिए और अपनी बहनों का बेटियों का हलाला कराइए और यदि आप अपनी बहन-बेटियों की इज्जत और जीवन को सुरक्षित और खुशहाल रखना चाहते हैं तो, सामने आकर इस कुप्रथा का विरोध कीजिए और सती प्रथा की तरह ट्रिपल तलाक की भी अमानवीय प्रथा को खत्म करने की पहल कीजिए.
आशुतोष की कलम से

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