सोमवार, 6 मार्च 2017

मीडिया के कुचक्र में फसता राष्ट्रीय संघ सेवक -डॉक्टर कुंदन चंद्रावत की बर्खास्तगी

● राष्ट्रीय संघ सेवक के नेता डॉक्टर कुंदन चंद्रावत ने केरल में संघ के कार्यकर्ताओं की रोज रोज हो रही हत्याओं से व्यथित होकर भावावेश में ये बयान दे दिया कि, केरल के मुख्यमंत्री का जो सर काट कर लाएगा उसको वो अपनी जीवन भर की पूंजी वो मकान दे देंगे जिसकी कीमत एक करोड तो होगी ही..अब यह एक उत्तेजना में दिया गया बयान था मगर बयान तो दिया गया था, बाद में उन्होंने संघ के कहने पर, इस पर माफ़ी भी मांगी मगर संघ ने, जिसपर फासीवादी होने का आरोप लगता है उसने उन्हें बर्खास्त कर दिया..
● पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का एक मुस्लिम नेता इमरान मसूद मोदी की बोटी बोटी काटने की धमकी देता है।कांग्रेस न उसकी निंदा करती है ना उस पर कोई कार्यवाही करती है । उसने कभी अपने इस बयान के लिए माफी भी नहीं मांगी और इस विधानसभा चुनाव में वह राहुल गांधी के चहेतों में शामिल था..
● पिछले कई दशकों से केरल में वामपंथियों द्वारा हिंदुओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थकों की थोक में हत्याएं की गई मगर ना तो वामपंथियों ने इस पर कोई अफसोस जताया ना ही कोई कार्यवाही की।।।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बुद्धिजीवियों से भरा हुआ वैचारिक रूप से बहुत ही उच्च सोच वाला संगठन है। मगर मेरी अल्प बुद्धि में जो बात समझ में आ रही है कि हम वही गलतियां कर रहे हैं,जो कभी मुगलों के साथ युद्ध में हमारे हिन्दू राजाओं ने की। मुगल हमेशा हमारे बच्चों और महिलाओं को टारगेट करते रहे और हम आदर्शवाद के उच्चतम स्तर का लबादा ओढ़े हुए युद्ध करते थे.मुग़ल सैनिक युद्ध के समय अपने परिवार महिला बच्चों की चिंता से मुक्त रहते थे क्योंकि अगर हिन्दू उन्हें पाएंगे तो सम्मान से घर भेज देंगे जबकि हिन्दू योद्धा इसी चिंता में रहते हुए युद्ध लड़ते थे की अगर उनका परिवार महिलाएं बेटियां मुगलो के हाथ लग गई यो तो चौराहे पर नंगी घुमाई जाएँगी इसलिए एक ओर सैनिक युद्ध के लिए प्रस्थान करता दूरी और जौहर के लिए चिताएं सजा दी जाती थी की हिन्दू स्त्रियों की इज्जत बच जाए जान भले ही जाये...
इस प्रकार नैतिक उच्चता के मानदंड स्थापित करके आप मारे ही जायेंगे, जैसा केरल में खा रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा एक दो राज्यों में अंतिम समय में सरकार बना लें.. यहाँ हलाहल को हलाहल से धोने की जरूरत है..सर काटने वालों के सामने सहिष्णुता और चरखा कातने की विचारधारा ने लाखों की हत्या करवाई और भारत का विभाजन कराया.मेरे समझ से भले ही आरएसएस कुंदन जी का समर्थन न करती मगर मिडिया के दबाव में आ कर उनको संघ के दायित्यों से मुक्त करना,समर्पित कार्यकर्ताओं में निराशा का भाव ले आएगा...
आशुतोष की कलम से

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