गुरुवार, 2 मार्च 2017

कन्हैया और उमर खालिद की मां की चू......डी

कन्हैया और उमर खालिद की मां की
चू......डी।
अगर ऊपर की लाइन आपको और अभद्र, असंसदीय और अश्लील लगी तो इस पोस्ट को पूरा पढ़िए और समझिए।ऐसा लिखने का उद्देश्य कहीं से भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से किसी का अपमान करना या किसी को अपशब्द करना कहना नहीं था, परंतु परिस्थितियों को समझाने के लिए इस प्रकार का शब्द प्रयोग करना पड़ा....
अगर आप मेरी पोस्ट की पहली लाइन को देखें और जरा भी समझदार हैं, तो मुझे अभद्र भाषा बोलने वाला कह सकते हैं, परंतु क्या आप यह बात कोर्ट ने साबित कर सकते हैं??? नहीं, क्योंकि कोर्ट में जब दलील दी जाएगी तो मैं कहूंगा की इसमें "चू......ड़ी" शब्द का प्रयोग किया गया है, जोकि कहीं से भी अभद्र नहीं है.. और सभी यह जानते रहेंगे कि मैं क्या कहना चाहता हूं परंतु फिर भी बरी हो जाऊंगा...
कन्हैया,उमर खालिद,अनिर्वान या जो भी देशद्रोही वामपंथी विचारधारा के लोग हैं, भारतीय न्यायपालिका में इसी "चू...डी" के कारण बच जाते हैं, वो पूरे 1 घंटे नारे लगाएंगे हम ले के रहेंगे आजादी,कश्मीर मांगे आजादी, मणिपुर मांगे आजादी,बंगाल मांगे आजादी,बस्तर मांगे आजादी,हम लेकर रहेंगे आजादी और अंत के 1 मिनट में यह बोलेंगे गरीबी और सामंतवाद से आजादी और यही एक मिनट उन्हें कोर्ट से बऱ़ी करा देगा...और इसी कारण आज सब पूछते हैं कि अगर देशद्रोही हैं तो साबित करके दिखाओ...
ठीक वैसे ही जैसे जैसे शराब का विज्ञापन बंद होने के बाद बैगपाइपर , नाम की शराब बनाने वाली कंपनी पूरे विज्ञापन को बैगपाइपर सोडा के नाम पर चलाती है, मगर हम सब समझ जाते हैं कि यह सोडा नहीं शराब का विज्ञापन है.ठीक उसी प्रकार जैसे सिगरेम्स कंपनी 100 पाइपर नाम की दारू का प्रचार 100 पाइपर कैसेट्स और सीडीज के नाम पर करती है,मगर सभी जानते हैं कि वो दारु परोस रही है...मगर ये सभी शराब कम्पनियाँ कोर्ट में बच जाएँगी, क्योंकि वह कहेगी कि हम तो सोडा कैसेट और सीडी बेच रहे थे...
इसी प्रकार की आजादी बेचने वाली दूकान वामपंथी कम्युनिष्टों ने खोली है.. दरअसल वो कश्मीर और बस्तर की आजादी के नारे लगाकर पाकिस्तान चीन का समर्थन और भारत का विरोध ही करते हैं, मगर भारत की न्यायपालिका द्वारा लात ना खाना पड़े इसलिए अंत में एक पंक्ति गरीबी और सामंतवाद से आजादी जोड़कर अपने आप को बचा लेते हैं..
भारत के कानून के अनुसार ना तो दारु का विज्ञापन बंद हुआ, ना तो कन्हैया और खालिद की माँ की चू....ड़ी पर कोई समस्या होगी और ना ही कश्मीर बस्तर और मणिपुर की आजादी के नारे पर किसी को सजा मिलेगी...भारत के कानून में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है...
एक और बात, जब नगर निगम की सरकारी दवाओं के छिड़काव से भी कुछ मच्छर बच जाते हैं,तो उसे मारने की जिम्मेदारी नागरिकों की होती है, चाहे हाथ से मारे या कोई और स्प्रे से...भारत को भी इन लाल मच्छरों से आजादी चाहिए..
आशुतोष को कलम से

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आप को ये लेख कैसा लगा अपने विचार यहाँ लिखे..