शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

जेहाद समर्थक-कांग्रेस

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में प्रस्तुत किये गए संविधान के इंडियन पैनल कोड की धारा- 212 में प्रावधान है कि अपराधी को भागने में मदद करने वाले को अपराधी मानते हुए कानूनन मुकदमा चलाया जाएगा और उसे 5 साल तक जेल की सजा हो सकती है। मुझे मालूम नहीं कि भारत के एक अभिन्न हिस्से,जम्मू और कश्मीर में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का संविधान चलता है या नहीं इतना जरूर मालूम है कि पार्टियां बाबा साहब के नाम के खाद पानी से अपने वोट बैंक की फसल लहलहाती रहती है।
ताजा मामला जम्मू कश्मीर का है, जहाँ सेना प्रमुख विपिन रावत के एक बयान पर मोहर्रम का माहौल बना हुआ है। मोहर्रम मनाने वाली प्रमुख पार्टी है कांग्रेस और सेकुलर कीड़े। घटनाक्रम कुछ इस प्रकार का था कि जम्मू कश्मीर में कुछ आतंकवादी छिपे हुए थे और भारतीय सेना और उन जेहादियों के बीच एनकाउंटर हो रहा था । जब तक आतंकवादी भारतीय सेना पर गोलियां चला रहे थे तब तक तो कोई समस्या नहीं थी, लेकिन जैसे ही भारतीय सेना आतंकवादियों के सामने भारी पड़ने लगी और उनको 72 हूरों के दर्शन कराने लगी ठीक उसी समय जम्मू कश्मीर के स्थानीय मुसलमानों ने सेना के ऊपर पत्थर फेंकना शुरु कर दिया और मस्जिदों से सेना के खिलाफ तकरीरें शुरू कर दी जिससे कि आतंकवादियों को भागने का मौका मिल सके।खैर जैसे-तैसे तकरीरों और पत्थरों से बचते हुए भारतीय सेना ने अपना अपरेशन पूरा किया..इससे पहले भी जम्मू कश्मीर में सेना के ऑपरेशन शुरू होते ही मस्जिदों के लाउडस्पीकर से "पाकिस्तान जिंदाबाद" के नारे लगने शुरू हो जाते रहे हैं..इस ऑपरेशन के बाद सेना प्रमुख विपिन रावत का एक बयान आया कि आतंकवादियों की सहायता करने वाला या सेना की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न करने वाले लोग भी आतंकवादियों के साथ माने जाएंगे।
मेरे समझ से एक भारतीय होने के कारण,किसी को इसमें कोई समस्या या कष्ट नहीं होना चाहिए मगर तुष्टीकरण की राजनीति इस हद तक हावी हो चुकी है तुरंत आनन फानन में कांग्रेस पार्टी ने सेना प्रमुख के इस बयान का विरोध करना शुरु कर दिया।।आखिर कांग्रेस क्या कहना चाहती है?? यदि हमारे भारतीय सेना के जवान आतंकवादियों के खिलाफ युद्ध लड़ रहे हैं और स्थानीय लोग उनके ऊपर ग्रेनेड और पत्थर फेंक रहे हैं तो क्या सेना के जवान उनको सिर्फ इसलिए मिठाई बाटे की उनके ऊपर हमला करने वाले मुसलमान धर्म को मानते हैं और इसके लिए मस्जिदों से निर्देश दिया जा रहा था?? कांग्रेस ने सेना प्रमुख के बयान पर इस प्रकार हो हल्ला मचाया कि अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें सफाई भी देनी पड़ी।
कांग्रेस ने शायद यह बयान उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए मुस्लिम वोटों के तुष्टिकरण के परिप्रेक्ष्य में दिया है मगर क्या ऐसा करके कांग्रेस, भारत के सभी मुसलमानों को एक ही श्रेणी में खड़ा करके जेहाद समर्थक नहीं घोषित कर रही है ?? क्या आतंकवादियों के समर्थकों के पक्ष में आवाज उठाकर कांग्रेस यह साबित नहीं कर रही है कि वह एक देशद्रोही गद्दारों आतंकवादियों का समर्थन करने वाली पार्टी बनती जा रही है ?? क्या इस मुद्दे पर चुनाव आयोग संज्ञान लेगा ?? केंद्र की सरकार में आसीन भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके कांग्रेस की इस बयान की निंदा की है । भाजपा के अनुसार सेना को आतंकवादियों और उसके समर्थकों से निपटने की पूरी छूट दी जानी चाहिए।।
मेरा कांग्रेस समेत सभी विपक्ष के मित्रों से अनुरोध है कि समस्या नरेंद्र मोदी से है तो Narendra Modi को जम कर कोसो,आलोचना करो या गाली दो(जैसा की अपशब्द आप लोग कहते ही रहते हैं) मगर मोदी को निचा दिखाने के चक्कर में सेना को मत कोसो , आतंकवादियों का समर्थन करके खुद को पाकिस्तान की श्रेणी में न लाओ और तो और मोदी के आलोचना के चक्कर में भारतीय संविधान का अपमान करके बाबा साहेब भीमराव का अपमान न करें....
आशुतोष की कलम से

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आप को ये लेख कैसा लगा अपने विचार यहाँ लिखे..