शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

कश्मीर की राह पर चलता पश्चिम बंगाल.सरस्वती पूजा प्रतिबंधित (Ban Saraswati pooja in WB)


मित्रों आज यह पोस्ट में बहुत ही व्यथित मन से लिख रहा हूँ। हमारी राजनैतिक प्रतिबद्धताएं कुछ भी हो सकती है कोई भारतीय जनता पार्टी का समर्थक हो सकता है कोई सपा बसपा या कांग्रेस का, मगर इन सब से इधर हम एक मनुष्य है और एक हिंदू है। ऐसा माना जाता है कि हिंदू धर्म के अनुयायी स्वभाव से सहिष्णु एवं सर्वधर्म समभाव को मानने वाले होते हैं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण पारसी कौम है जिसका अस्तित्व पूरे विश्व से खत्म हो गया मगर वह अपनी मान्यताओं के साथ हिन्दू बहुल भारत में सुख सुविधा एवं शांति से रह रही है।
खैर बात पारसी कौम कि नहीं मैं आज स्पष्टतया वार्ता रेडिकल इस्लाम के अनुयायियों के संदर्भ में करना चाहूंगा। जहां भी इस विशिष्ट प्रकार के इस्लाम धर्म को मानने वाले अनुयायियों की संख्या कुल जनसंख्या का 30% से अधिक हो जाती है वहां अन्य धर्मावलंबियों की स्वतंत्रता का हनन एवं अतिक्रमण शुरू हो जाता है जैसे यह जनसंख्या 50% से ऊपर होती है,अन्य धर्मावलंबियों के पास सिर्फ यही रास्ता बचता है कि या तो वह लोग इस्लाम धर्म स्वीकार कर लें या उस क्षेत्र को छोड़कर चले जाए। जहां पर इस्लामिक अनुयायियों की जनसंख्या 50% से अधिक हो चुकी है तो एक और काम किया जाता है गैर मुस्लिमों को काफिर घोषित करके उनकी हत्या शुरू कर दी जाती है,उनकी बच्चियों का रेप किया जाता है,उनकी महिलाओं को चौराहे पर नंगा किया जाता है और इन सब अत्याचारों से तंग आकर या तो वह इस्लाम स्वीकार कर लेता है या क्षेत्र से छोड़ कर चला जाता है।
आपको यह बात अतिशयोक्ति लग सकती है मगर स्वतंत्र भारत में जम्मू और कश्मीर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है जहां इस्लाम के अनुयायियों की जनसंख्या बढ़ते ही कश्मीर के हिंदुओं को उनके घरों से बेघर कर दिया गया।उनकी बच्चियों का बलात्कार हुआ और आज वह दिल्ली और जम्मू के शरणार्थी कैंप में अपने ही देश में शरणार्थी बने 27 साल से जीवन गुजार रहे हैं। भारत में कई अन्य राज्य हैं जहां हिंदू जनसंख्या बहुसंख्यक है वहां पर मुसलमान या अन्य धर्मावलंबी बहुत ही आसानी से अपना जीवन यापन और व्यापार आजीविका चला रहे हैं मगर यह सहिष्णुता इस्लामिक बहुल क्षेत्रों में हिंदू जनसंख्या के साथ कभी नहीं दिखाई जाती है। ईद के अवसर पर बेगानी शादी में दीवाने हिंदू अब्दुल्लाओं को तो आपने देखा ही होगा वह लोग अपने अन्य हिंदू मित्रों को ईद मुबारक ईद मुबारक का संदेश भेजते रहते हैं । मगर जब बात आती है हिन्दू त्योहारों की तो ये सहिष्णुता किस कब्रिस्तान में दफ़न कर दी जाती है..सरस्वती पूजा और दुर्गापूजा हिंदुओं का नहीं पूरे भारत का त्यौहार है भारत की संस्कृति का द्योतक है.कश्मीर में तो हिंदु त्योहार की आप सोच ही नहीं सकते। माँ दुर्गा और विद्या की देवी सरस्वती की पूजा अब पश्चिम बंगाल में प्रतिबंधित कर दी गई और कारण ये है कि मुसलमान बिरादरी सरस्वती पूजा का विरोध कर रही है क्योंकि इस्लाम में सरस्वती पूजा हराम है और एक प्रमुख वजह ये है कि वहां जनसँख्या 30% से ज्यादा पहुच चूंकि है तो दूसरे धर्म वालों के अधिकार ख़त्म होने चाहिए..

.ये बच्ची पश्चिम बंगाल से है..ममता बानो की पुलिस ने इसे बर्बरता से पीटा..
अपराध ये है कि ये एक मुस्लिम बाहुल्य इलाके में रहती है और इसने स्कूल में सरस्वती पूजा मनाने का प्रयास किया..वहां के स्थानीय मुसलमानों ने कहा कि चूंकि इस्लाम में मूर्ति पूजा हराम है बंगाल में सरस्वती पूजन नहीं होगा ममता बैनर्जी सरकार ने भी इसका समर्थन कर दिया कि यदि मुसलमान बिरादरी को आपत्ति है तो पश्चिम बंगाल के स्कूलों में विद्या की देवी सरस्वती की पूजा नहीं होनी चाहिए...इस लड़की ने प्रतिरोध किया तो इसका सर फोड़ दिया गया...
अब न तो महिला अधिकार वाले आएंगे, न मानवाधिकार न बड़की बिंदी गैंग न ही मोमबत्ती गैंग..क्योंकि ये लड़की हिन्दू जो ठहरी और हिन्दू तो लात खाने के लिए ही होता है...
वैसे बंगाली हिंदुओं से मुझे जरा भी संवेदना नहीं है क्योंकि ये भविष्य उन्होंने मतदान करके खुद चुना है.जो कुछ लोगो ने इस चुनाव का विरोध किया उनके प्रति संवेदना है क्योंकि गेंहूँ के साथ घुन को पीसना पड़ता है. अब बस उसी दिन की प्रतीक्षा है को कब कश्मीर के हिंदुओं की तरह बंगालियों के घर के बाहर लिखा जाता है कि या तो बंगाल छोड़ दो,या इस्लाम स्वीकार करो या मरने और बलात्कार के लिए तैयार रहो...
अभी कुछ मित्र हल्ला मचाते आएंगे की सभी मुसलमान एक जैसे नहीं होते.तो मैं अपना प्रसंग बता दूं कि मुझे नवरात्रि, जन्माष्टमी, दुर्गापूजा की बधाइयाँ मेरे मुसलमान मित्र फोन से लेकर मेसेज के रूप में भेजते हैं मगर समस्या ये है मैं जहां रहता हूँ वहां प्रतिशत अभी 10 -12 वाला है..पश्चिमीयूपी में यही प्रतिशत 25 से 30 होते ही मंदिरों से लाउडस्पीकर उतरवाने के लिए आंदोलन होने लगते हैं फतवे जारी होने लगते हैं..बंगाल में सरस्वती और दुर्गा की पूजा प्रतिबंधित हो जाती है और कश्मीर में तो हिंदुओं को जीने का अधिकार नहीं है उन्हें गोली मार दी जाती है.और बाद में एक लाइन में समस्या का समाधान की 4 लाख लोगो को बेघर किसी इस्लाम ने नहीं राजनीति ने किया.. हाँ वही राजनीति जो पाकिस्तान सीरिया सूडान लीबिया मिस्र अफगान तुर्की जार्डन और यमन में चल रही है..वही जिसमें सिंजर की पहाड़ियों में अल्पसंख्यक यजिदियों को कुछ साल पहले तडपा तड़पा कर मार डाला गया और उनकी महिलाएं आज भी "जेहादियों" की सेक्स स्लेव या रखैल बनी हुई हैं..
जहां तक मुद्दा बंगाल का है बंगाल की जनता ने अपनी आत्महत्या स्वयं चुनी है क्योंकि ममता बानो की सरकार सिर्फ 30 से 35% रेडिकल इस्लाम को मानने वाले लोग नहीं बना सकते हैं। इसमें एक बहुत बड़ा सहयोगी वर्ग हमारे उन सेकुलर हिंदुओं का है जिनके निजी स्वार्थ के आगे उनका धर्म उनकी पूजा पद्धति उनकी संस्कृति सभी कुछ गौण हैं। "कश्मीरी पंडितों" ने यही गलती की और खामियाजा वो आज दिल्ली के फुटपाथ पर हैं और उनकी महिलाएं जेहादियों के बलात्कार का शिकार.."बंगाली हिंदुओं" ने इतिहास से सीख नहीं ली और अपनी कब्र खुद खोद ली है ममता बानो की सरकार को चुनकर..इस्लाम तो वही कर रहा है जो महमूद गजनवी,बाबर,औरंगजेब ने किया मगर आप क्या चुन रहे हैं? अपनी अक़्तमहत्या और अपने बच्चों की हत्या???? इस पर विचार कीजिये और इतने लंबे लेख के बाद न समझ आया हो तो नीचे वाला वीडियो देख लीजिये विश्वास मानिये सेकुलरिज्म का बुखार कुछ न कुछ जरूर कम होगा...

आशुतोष की कलम से

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