सोमवार, 23 जनवरी 2017

सिकंदर(Alexander‬ ‪)- विश्वविजेता या एक पराजित लुटेरा शासक ? Part-3


मित्रों जैसा की लेख के पिछले दो भागों में आप ने पढ़ा की किस प्रकार धूर्तता और अतार्किक कहानियों की सहायता से सिकंदर को विजेता घोषित करने की कोशिश कुछ बिदेशी और भारत विरोधी वामपंथी इतिहासकारों ने की . ग्रीक और रोमन इतिहासकारों के पुस्तकों के सन्दर्भ से ही पिछले दो भागों में ये लगभग साबित हो गया है की सिकंदर की विजय नहीं हुई है आप इस लेख की दोनों कड़ियों को निम्न लिंक पर पढ़ सकते हैं
सिकंदर की पराजय भाग 1 https://goo.gl/TZkB6c
सिकंदर की पराजय भाग 2 https://goo.gl/TeCZ26
महाराजा पोरस को जब यह सूचना मिली की सिकंदर कड़ी के मैदान में पंहुच गया है तो उन्होंने अपने बेटे को सिकंदर से लड़ने के लिए 2000 अश्वरोहीयों और 120 रथ की छोटी सी सेना के साथ भेज दिया. इसका उद्देश्य ये था की इससे यूनानी सेना की शक्ति का अनुमान लगाया जा सके.
यूनानी इतिहासकार एरियन के शब्दों में “ बहुत दिनों की प्रतीक्षा के पश्चात एक दिन सिकंदर घोर अंधकार में नदी को पार कर गया भारतीय राजकुमार के हाथो सिकंदर घायल हुआ और उसका घोडा बकाफल मारा गया.”
यूनानी लेखक जस्टिन (justin) इस बात को स्वीकार नहीं कर पाता है की तथाकथित विश्वविजेता सिकंदर,पोरस के बेटे से युद्ध में घायल हो गया और उसका घोडा मारा गया परन्तु सत्य को लिखने से स्वयं को रोक नहीं पाता और इसका ठीकरा अन्य यूनानी लेखको के सर फोड़ते हुए कहता है की “ Other writers state that there was a fight at actual landing between Alexander’s Cavalry and a force of Indians commanded by porus’s son,who was there ready to oppose them with superior numbers and that in the course of fighting he wounded alexander with his own hand and struck the blow which killed his beloved horse Buccphalus’’
अब यहाँ से ये स्पष्ट हो जा रहा है की शुरुवात में ही सिकंदर के लिए भारत का युद्ध कठिन पड़ने लगा था.पोरस की शक्तिशाली सेना के सामने सिकंदर को झेलम पार करना ही असंभव सा लगने लगा युद्ध जितना तो बहुत ही दुष्कर कार्य था.
रोमन लेखक कर्टियस ने लिखा है “सिकंदर की कुछ सेना नदी के मध्य एक टापू पर पहुच गई,परन्तु सिकन्दर की सेना को शत्रु (पोरस) ने घेर लिया जो गुप्त रूप से टापू पर पहुच गयी थी.पोरस के सैनिको ने यूनानियों का सफाया कर दिया और जो बचा कर भाग निकले वो नदी की बाढ़ में बह गए और मझदार में बैठ गए .पोरस नदी के किनारे से युद्ध के इस उतार चढाव को देख रहा था और अपनी विजय देख उसका आत्मविश्वास और बढ़ गया..”
सिकन्दर झेलम के किनारे जिस स्थान पर आ के रुका था वहां तो पोरस की सुव्यवस्थित सेना खड़ी थी अतः सिकंदर ने 16 मिल दूर जा के एक चढ़ाई से नदी जैसे तैसे पार की शत्रु की गतिविधियों का पूर्ण ज्ञान नहीं होने के कारण पोरस कहीं हट नहीं सकता था और सिकन्दर दुसरे रस्ते से कड़ी ग्राम के पास झेलम पार कर के अपनी बची सेना के साथ पहुच गया और सेना सजा दी. इसकी खबर मिलते ही पोरस की सेना युद्ध के लिए सामने आ गयी.रोमन इतिहास कार लिखते हैं की हालांकि सिकन्दर ने अपनी सुविधा वाले स्थानों पर सेना सजाई थी फिर भी पोरस के सेना में हाथियों की संख्या देखकर सिकंदर के होश उड़ गए
कड़ी का युद्ध :
जैसा की पहले भी बताया जा चूका है की युद्ध के आरम्भ होते ही सिकंदर का घोडा मारा गया इस बात की पुष्टि रोमन लेखक जस्टिन भी करता है उसके अनुसार “प्रथम बार में ही सिकंदर का घोडा मारा गया और वह स्वयं भी सर के बल गिर पड़ा लेकिन उसके रक्षको ने उसे बचा लिया जो वहां पहुच गये थे”
युद्ध की घटनाओं का विवरण देखने पर पता चलता है की पुरे दिन युद्ध चलता रहा और पोरस के हाथियों ने सिकन्दर की सेना को भीषण क्षति पहुचायी. अब इस क्षति का वर्णन
रोमन लेखक कर्टियस के शब्दों में “ सब से भयानक दृश्य तो हाथियों द्वारा सशस्त्र यूनानी सैनिको को अपनी सूंढ़ में पकड़ ऊपर बैठे अपने महावत को देना था जो उनके सर काट कर फेक देता था.युद्ध संदिग्ध रूप में रहा,कभी यूनानी सेना हाथियों का पीछा करती तो कभी स्वयं उनके डर से भाग खड़ी होती थी.इस प्रकार युद्ध होता रहा जb तक की दिन की समाप्ति नहीं हुई.”
यूनानी लेखक /इतिहासकार डायोडोरस लिखता है की “हाथी अपनी विशाल काया और बल के कारण बड़े लाभदायक सिद्ध हुए. बहुत से हाथियों ने शत्रु सैनिको को अपने पैरों तले कुचल डाला और उनके हड्डियों तक को पीस कर रख दिया. भयानक मृत्यु का दृश्य था . हाथी सैनिको को अपनी सूंड में जकड़ कर ऊपर उठाते थे और उन्हें जमीन पर पटक कर समाप्त कर देते थे.
Upon the elephants, applying to good use their prodigious size and strength, killed some of the enemy by trampling under their feet, and crushing their armour and their bones,while upon other they inflicted a terrible death, for they first lifted them aloft with their trunks ,which they are twisted round their bodies, and then dashed them down with their great violence to the ground. Many others they deprived in a moment of life by goring them through and through with their tusks.”
रोमन लेखक एरियन लिखता है की “हाथियों की सेना ने व्यवास्थित यूनानी सेना को कुचल डाला..
”….the monster elephants plunged this way and that among the lines of infantry dealing Destruction in solid mass of the Macedonian phalanax…”(Ibid P. 178)
सिकन्दर और यूनानी सेना की इतनी बड़ी क्षति के स्वीकरोक्ति के बाद किस प्रकार एरियन ने सिकंदर की झूठी शान बनाये रखने के लिए तथ्यों से खिलवाड़ किया वो इस प्रकार है .”झेलम के युद्ध में यूनानी सेना के सिर्फ 80 पैदल और 230 सवार मारे गए लेकिन वही दूसरी और जो भारतीय सेना रोमन सेना को तबाह कर रही थी उसके 20000 पैदल तथा 3000 सवार मारे गए ..सनद रहे की ये वही एरियन है जिसने कहा की “हाथियों की सेना ने व्यवस्थित यूनानी सेना को कुचल कर तहस नहस कर डाला था ..
ठीक इसी प्रकार जिस प्रकार एरियन ने अपने खुद के लिखे को झुठलाते हुए सिकन्दर को विजेता बनाने का प्रयास किया है उसी प्रकार कांग्रेस पोषित वामपंथी लेखकों ने भी किताबो में लिख दिया की सिकंदर की विजय हुई हमने किताबों में पढ़ा और उसे सच मान लिया.. Cambridge-Ancient History Pt IV, के पृष्ठ संख्या 40 का सन्दर्भ लें तो स्पष्ट लिखा है की “झेलम युद्ध में सिकंदर की सैनिक हानि पर बड़ी सावधानी से पर्दा डाला गया है .
एक कहानी जो भारत के विरोधी वामपंथी इतिहासकार अक्सर कहते हैं की पोरस अपनी सेना के साथ हाथियों से सिकन्दर की सेना का कुचलता जा रहा था तभी सिकंदर के सैनिको ने हाथियों पर बरछे भाले इत्यादि से हमला कर दिया और हाथियों ने अनियंत्रित होकर अपने ही सैनिको को कुचलना शुरू कर दिया और पोरस युद्ध हार गया .
यदि ये बाद पश्चिम के लेखक कहते हैं तो उनकी अपनी निश्तायें हो सकती है मगर भारत में वामपंथी लेखकों ने इस बात को सिर्फ इसलिए पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से बढाया क्युकि भारत विरोध इन वामपंथियों के खून में दौड़ता है . खैर मूल प्रश्न पर आते है की पोरस की जितती सेना के हाथी अनियंत्रित हो गए मगर इस सन्दर्भ में यूनानी लेखक डायोडोरस जो लिखता है उस पर विचार किया जाये ..
“Then ensured a great Confusion but porus, who was mounted on the most powerful of all his elephents on seeing what had happened,gathered around him fourty of the animals that were still under control and falling upon the enemy with all the weight of the elephants,made a great Slaughter with his own hand, for he far surpassed in bodily strength and soldiers of his army.’’ (369/167)
डायोडोरस लिखता है कि “ पोरस अपने सबसे ताकतवर हाथी पर सवार था और उसने हाथियों को अनियंत्रित होता देख अपने 40 हाथियों को (जो अब भी उसके नियंत्रण में थे ) लेकर शत्रु सेना अर्थात सिकंदर की सेना पर टूट पड़ा और बड़ा नरसंहार किया.’’ यहाँ तो बड़ा नरसंहार डायोडोरस ने लिख दिया मगर झूठ की पराकाष्ठा ये है कि कई लेखक पर्दा डालते हुए ख रहे हैं कि,युद्ध में पोरस द्वारा किये गए इस भयानक नरसंहार में यूनानी सेना के 80 पैदल और 230 सवार मारे गए लेकिन वही दूसरी और जो भारतीय सेना रोमन सेना को तबाह कर रही थी उस भारतीय सेना के 20000 पैदल तथा 3000 सवार मारे गए...ये दोनों विरोधाभास ये बताने के लिए पर्याप्त हैं इतिहास लेखन में सिकन्दर ही हार को छिपाने का हर संभव प्रयास लेखनो ने किया और बाद में वामपंथी इतिहासकारों ने तो उसे सिकन्दर की जीत घोषित करके उसकी नयी पीढ़ी को उसकी घुट्टी पीने के लिए , सिकन्दर को भारतीय इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में विजेता घोषित कर दिया.
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लेख के अगले भाग में भारतीय सैन्य क्षमता का अद्भुत वर्णन और युद्ध के आगे के कुछ और तथ्य जो ये साबित करेंगे की सिकन्दर पराजित होकर भारत से भागा था.
आशुतोष की कलम से

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