शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

सेकुलरिज्म या हिन्दुविरोध की दोगलापंथी (‎Dual_Standerd)

  गाय काट के खाने के खिलाफ बोलना या प्रदर्शन करना अपराध और गुंडागर्दी माना जाता है.गाय खाना मौलिक अधिकार बन जाता है, मगर बैल को काबू करने का खेल जलीकट्टू "बैलों" पर अत्याचार माना जाएगा..
मस्जिद में महिला नमाज नहीं पढ सकती ये धार्मिक स्वतंत्रता है मगर किसी विशेष शनि मंदिर में तेल चढाने से रोकते ही महिलाओं का उत्पीड़न शुरू हो जाता है.
मूर्तियों और मूर्तिपूजा को हराम मानने वाला "नमाजी नौशाद अहमद खान" सबरीमाला मंदिर में इतनी श्रद्धा दिखाता है की बिना हिन्दू परम्परा को जाने समझे "मासिक धर्म की आयु वर्ग वाली स्त्री का मंदिर में प्रवेश वर्जित" करने की परम्परा के खिलाफ कोर्ट में चला जाता है यही "नमाजी नौशाद अहमद खान" शरिया के अनुसार बाप द्वारा बेटी का बलात्कार कर देने पर उस बेटी को अपने बाप की बीबी बनाने के फैसले के खिलाफ अपनी बेगम के बुरके में घुस जाता है..
ईद के पावन अवसर पर लाखो ऊँटो,गाय,बकरो,
बैलो,को काट कर खाना जानवरो पर अत्याचार नहीं माना जाता मगर हिन्दू त्यौहार जल्लीकट्टू में बैलों की लड़ाई और बैलगाड़ी दौड़ को जानवरो पर महाअत्याचार माना जाता है और इस पर रोक लगा दी जाती है...
होली खेलना पानी की बर्बादी और ईद पर लाखो करोडो लीटर पानी मांस धुलने और साफ़ सफाई में खर्च करना धार्मिक स्वतंत्रता..
दीपावली पर पटाखे जलाना वायु प्रदूषण और ईसाई नव वर्ष 1 जनवरी पर पटाखे जलाना नव वर्ष सेलिब्रेशन..
हिन्दू स्त्री को पति तलाक दे तो उसे जीवन भर गुजारा भत्ता का अधिकार है जो की होना भी चाहिए मगर जब कोई मुसलमान अपनी बेगम को तलाक दे तो आजीवन गुजारा भत्ता देने का कोई प्रावधान नहीं है.और अगर कोर्ट ने चपड़ चूं की तो कांग्रेस "शाहबानो केस" जैसे कानून को बदल देगी..
मकबूल फ़िदा हुसैन जैसा मुसलमान दुर्गामाँ,
भारतमाँ,लक्ष्मीमाता,सरस्वतीमाँ की नंगी तस्वीरें बनाये तो वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसे पुरस्कार दिया जाता है दूसरी ओर अगर कमलेश तिवारी जैसा कोई हिन्दू मुहम्मद साहब को नंगा लिख दे तो उस पर रासुका लग जाता है और गला काटने के लिए पुरे देश में आतंकी जिहाद शुरू हो जाता है.
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ये विचारणीय प्रश्न है की सारे अत्याचार हिंदुओं पर ही क्यों होते हैं??Narendra Modi हो या Pravin Togadia जब तक सुविधा छोड़कर हिन्दू सड़को पर आ के अधिकार हेतु संघर्ष नहीं करेगा अत्याचार ऐसे ही सहना पड़ेगा...


आशुतोष की कलम से

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