रविवार, 12 अप्रैल 2015

आखिर सरकारें क्या छिपा रही हैं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के बारे में

नेताजी से सम्बंधित कुछ फेसबुक पोस्ट...
#सुभाषचंद्रबोस #कांग्रेसबेनकाब  #नेहरुबेनकाब
जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु के समय नेता जी संत के भेष में नेहरु को श्रधांजलि देने आये थे। श्रधांजलि समारोह की कई तस्वीरों में से ये डीओ तस्वीरे ऐसी हैं जिसमे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस स्पष्ट देखे जा सकते हैं।
इसका आज तक सरकार ने कोई खंडन या पुष्टि नहीं की।
आखिर जब नेता जी मृत्यु ताइवान में आजादी से पूर्व हुई थी तो लगभग 3 दशक बाद नेहरु के अंतिम संस्कार में दिख रहा ये व्यक्ति कौन है?? क्यों आज तक कांग्रेस की और अब वर्तमान में भाजपा की सरकार नेता जी से सम्बंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने से भयभीत क्यों है?  कुछ तो ऐसा बहुत बड़ा है जो सरकारें छिपा रही हैं। संभव है तथ्य ये हो की,नेताजी हिन्दुस्थान में सरकार की जानकारी के बाद भी थे और नेहरु ने उन्हें ब्रिटेन को नहीं सौपा और इससे ब्रिटेन से रिश्ते बिगड़ने का खतरा हो या कोई और जापान जर्मनी की गद्दारी जैसा तथ्य..जो भी हो इसे सार्वजनिक होना चाहिए जिससे आजादी के बाद से चली आ रही ये अनुत्तरित पहेली सुलझाई जा सके...

आशुतोष की कलम से
#beinghindu
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एक पक्ष ये भी हो सकता है की नेहरु ने ब्रिटेन और नेता जी या उनके परिवार  दोनों से अग्रीमेंट किया हो ब्रिटेन को कहा हो की नेताजी यदि पकडे गए तो उन्हें ब्रिटेन को सौप देगा और नेता जी के परिवार या नेता जी से अग्रीमेंट हो की आप गुमनाम हो कर हिन्दुस्थान में रहें और राजनीति में दखलंदाजी न करें। नेता जी सत्ता के लालची नहीं थे उन्हें भारत की आजादी से मतलब था वो आधी अधूरी मिल ही गयी थी अतः उनके पक्ष ने ये स्वीकार कर लिया हो । इसके बाद भी कहीं नेता जी राजनैतिक वापसी न कर लें इस डर से नेहरु नेताजी की लगातार निगरानी करता रहा हो..

आशुतोष की कलम से
#beinghindu
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हालांकि नेहरु ने भी देश के लिए कई कार्य और योगदान दिए हैं परन्तु अगर हिंदुस्थान की सत्ता नेहरु की जगह सुभाष चन्द्र बोस के हाथो में सौपी जाती तो चीन की औकात नहीं थी जो हमसे जमीन हड़प पाता उल्टा तिब्बत और पूरा कश्मीर भारतीय सीमा में होते। आज हम फ़्रांस से राफेल खरीदने की जगह विश्व को विमान निर्यात कर रहे होते। आयुध और सामरिक दृष्टि से हम आत्मनिर्भर होते और विश्व के मार्गदर्शक भी।
ये बात मैं क्षणिक भावना के आधार पर नहीं लिख रहा न ही कांग्रेस के विरोध के कारण ये बाते तथ्यों पर आधारित हैं। आप भी जान लें
# सुभाष चन्द्र बोस वे पहले व्यक्ति थे जो समकालीन राजनीति में गाँधी से भी ज्यादा प्रभावशाली थे।
# सुभाष चन्द्र बोस वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ समानंतर सेना बना दिया था और उनसे युद्ध में सक्षम थे।
# सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान,फिलीपाइन, कोरिया,चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी।(ref:wiki)
# सुभाष चन्द्र बोस ने हमला करके अंडमान और निकोबार द्वीप जीत लिये। नेताजी ने इन द्वीपों को "शहीद द्वीप" और "स्वराज द्वीप" के रूप में नामकरण दिया। सर्वप्रथम आजाद भारत का झंडा इन्ही द्वीपों पर फहराया गया था।
# गाँधी ने अपनी पकड़ बनाये रखने और नेहरु प्रेम में सुभाष को कांग्रेस से इस्तीफा देने पर मजबूर किया परन्तु सुभाष ने इस अपमान के बदले सुभाष ने  मोहनदास करमचंद को "राष्ट्रपिता" नाम दिया।
#1962 जंग से पहले नेहरु और रक्षामंत्री का कहना था की हमें सेनाओं और हथियारों की क्या जरुरत है और 1962 की जंग भारत हार गया क्या सुभाष जैसे के प्रधानमंत्री रहते ऐसा संभव था की सेना के बारे में ऐसा विचार रखा जाता।
अब जब ये स्पष्ट हो चूका है की सुभाष चन्द्र बोस आजादी के काफी बाद तक जीवित थे तो सरकार को इससे सम्बंधित फाइलें सर्वजनिक करके देश की जनता के सम्मुख सत्य सार्वजनिक करना चाहिए.

आशुतोष की कलम से
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