रविवार, 2 नवंबर 2014

मोदी के बयान पर व्यर्थ का हंगामा क्यों??

कृपया ये पोस्ट  ध्यान से पढ़ें और कम से कम एक कांग्रेसी और सेकुलर पत्रकार से जरुर शेयर कर दे।।क्या मिडिया और कांग्रेस के लोग हद दर्जे के बेवकूफ और कुंठित हो गए हैं जो मोदी के साधारण से बयान पर वैचारिक उलटी करने लगे हैं???चलिए बयान बता देता हूँ जिस पर विधवा विलाप हो रहा है।
"किसी को भी नहीं मालूम की बिदेशों में किन काला धन है मगर विश्वास दिलाता हूँ चाहे हजार करोड़ लाख अरब या ख़रब कितना भी हो उसकी एक एक पाई देश में लाऊंगा": नरेन्द्र मोदी
सबने आधी लाइन पर विरोध करना शुरू कर दिया।। चलिए इस आधी लाइन का सच भी बता देता हूँ।
आरोप: मोदी ने चुनाव से पहले काले धन का आंकड़ा दिया था आज क्यों कह रहे हैं की कितना है ज्ञात नहीं??
समाधान: मेरे प्यारे सेकुलर मित्रों,कांग्रेसियों एवं कांग्रेस के दलाल पत्रकार एवं मित्रों ।चुनाव से पहले मोदी केन्द्रीय शासन के सन्दर्भ में एक सामान्य व्यक्ति थे और राष्ट्रिय(केन्द्रीय) स्तर पर किसी संवैधानिक पद पर नहीं थे उनके पास अपने श्रोत से कुछ आंकड़े आये और उन्होंने जनता के सामने रक्खा। आज जिस व्यक्ति ने आप से बात किया वो हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री था उनके द्वारा वही आंकड़े दिए जा सकते हैं जो सरकार और उसकी एजेंसी द्वारा वेरीफाई हो ।। हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री वो आंकड़े नहीं दे सकता जो भाजपा का कोई नेता,CM,या स्वामी रामदेव ने दिया हो। अब पिछले कई सालों से कांग्रेस की सरकार रही और जैसा की आप सभी जानते हैं की कालेधन के असली मालिक वही कांग्रेसी हैं अतः उन्होंने ज्यादा आंकड़े इकठ्ठा नहीं किये।।मोदी सरकार बने पांच माह हुए हैं और 5 माह में सभी देश कालाधन खाताधारको का नाम दे देंगे ये सोचना अतिवाद और दिवास्वप्न है। प्रधानमंत्री ने इस दिशा में कार्य शुरू किया है तो जब तक सरकारी रूप से तथ्य सामने न आ जाये प्रधानमंत्री के रूप में मोदी यही कहेंगे की कितना धन है नहीं मालूम।
ठीक वैसे ही जैसे किसी जज के सामने किसी का मर्डर कर दिया जाये तो वो एक नागरिक के रूप पे कह देगा की मर्डर फला व्यक्ति ने किया है मगर जब वह न्यायधीश की कुर्सी पर होगा तो जब तक तथ्य और साक्ष्य सामने नहीं आ जायेंगे वो यही कहेगा की मैं नहीं कह सकता मर्डर किसने किया है।। वो व्यक्ति दोनों परिस्थितियों में सही होता है मगर वक्तव्य अलग अलग होते हैं। यही अंतर नरेन्द्र मोदी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वक्तव्यों में है।।
भाजपा की इस मुद्दे पर अब तक की गलती सिर्फ उसके एक नेता का  100 दिन वाला बयान है जिसे चुनावी उत्साह का जजमेंट एरर कह के आगे बढ़ सकते हैं या उस पर चाहे तो भाजपा की धज्जियाँ उड़ा सकते है ये किसी भी व्यक्ति का जनतांत्रिक अधिकार है।।
अब यदि मोदी की शुरू की आधी पंक्ति को मिडिया कांग्रेसी और अन्य सेकुलर ब्रम्हवाक्य मान कर इतना हो हल्ला मच सकते हैं तों ब्रह्मवाक्य की अगली आधी लाइन भी सुन ले और उस पर भी विश्वास करें और अगली आधी लाइन है,  
"विश्वास दिलाता हूँ चाहे हजार करोड़ लाख अरब या ख़रब कितना भी हो काले धन की एक एक पाई देश में लाऊंगा": "नरेन्द्र मोदी"
मुझे नहीं लगता की मोदी ने कोई भी एक ऐसा कारण दिया है की उन पर शक किया जाये। ज्यादातर मोर्चे पर अपेक्षाकृत बेहतर कार्य कर रही मोदी सरकार पर इस मुद्दे पर विश्वास किया जा सकता है। जब मेरे जैसे सामान्य बुद्धि के व्यक्ति को ये मतलब समझ में आ गया तो बड़े बड़े नेता जी लोग और कांग्रेसियों तथा उनके पालतू पत्रकारों को क्यों नहीं समझ में आ रहा ये एक विचारणीय मुद्दा है।। क्या विपक्ष कांग्रेस और मिडिया किसी अन्य मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए अनवाश्यक विवाद पैदा कर रही है???
आशुतोष की कलम से

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