बुधवार, 8 अक्तूबर 2014

वायु सेना दिवस पर निर्मल जीत सिंह सेखो को नमन

आज वायु सेना दिवस है।भारतीय वायु सेना के समस्त अधिकारीयों जवानों एवं अन्य कर्मचारियों को बधाइयाँ।। वायु सेना दिवस पर एक रोचक और शौर्य से भरा प्रसंग आप सब से साझा करना चाहूँगा।प्रसंग है इंडियन एयर फ़ोर्स के एकमात्र परमवीर चक्र पाने वाले वीर जवान "निर्मल जीत सिंह सेखो" का ।बात सन 1971 की है जब बांग्लादेश मुक्ति को लेकर भारत- पाकिस्तान युद्ध छिड़ा हुआ था। 14 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानियों ने सुबह सुबह छह साइबर जेट F-86 से एक साथ हमला किया।। निर्मलजीत सिंह सेखो उसी बेस पर तैनात और हमले के जबाब के लिए तैयार थे ।उनके साथ उनके साथी फ्लाइंग लैफ्टिनेंट घुम्मन भी कमर कस कर मौजूद थे।आठ बजकर दो मीनट पर पर खतरे का संकेत देख उन्होंने कंट्रोल से उड़ने की इजाजत मांगी और कुछ सेकेण्ड के इन्तजार के बाद जब कंट्रोल ने कोई जबाब नहीं दिया तो निर्मल जीत सिंह सेखो ने बिना कंट्रोल और सीनियर्स के इजाजत उडान भर दी और पाकिस्तानीयो के जहाज को अपने फाइटर से  दौड़ा दिया।अगले दो मिनट में निर्मलजीत सिंह सेखो और उनके मित्र घुम्मन आसमान में छह विमानों से लोहा ले रहे थे।इसके तुरंत बाद एक पाकिस्तानी जेट ने हवाई अड्डे पर बम गिराया एक और जहाज उसके साथ में था। निर्मल जीत सिंह ने अपना जहाज उन दोनों जेटो के पीछे लगा दिया और रेडियो सन्देश भेजा  ..
"मैं दो साइबर जेट जहाजों के पीछे हूँ...मैं उन्हें जाने नहीं दूँगा..."
और चंद सेकंडो बाद बड़ा धमाका हुआ और बम गिराने वाला पाकिस्तानी साइबर जेट आग के गोले में बदल चुका था।।
इसी समय निर्मलजीत सिंह सेखों का अगला संदेश आया :
'मैं मुकाबले पर हूँ और मुझे मजा आ रहा है। मेरे इर्द-गिर्द दुश्मन के दो साइबर जेट हैं। मैं एक का ही पीछा कर रहा हूँ, दूसरा मेरे साथ-साथ चल रहा है।'
कुछ देर बाद दूसरा धमाका हुआ और एक बड़े धमाके के साथ दूसरा पाकिस्तानी साइबर जेट भी ढेर हो गया।
इसके थोड़े ही देर बाद उनका एक आखिरी सन्देश सुना गया
'शायद मेरा नेट भी निशाने पर आ गया है. घुम्मन, अब तुम मोर्चा संभालो।
इसके बाद उन्होंने अपने जलते हुए फाइटर को सीधा रखते हुए लैंड करने की कोशिश की मगर विमान का  कंट्रोल सिस्टम अचानक फेल हो गया और विमान पहाड़ियों में जा गिरा अंतिम क्षणों में फ़्लाइंग अफसर निर्मलजीत सिंह सेखो ने इजेक्ट का आखिरी प्रयास किया मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थो और निर्मलजीत सिंह फाइटर प्लेन समेत पहाड़ियों में जा गिरे।।सेना और वायुसेना के तमाम आपरेशनो के बाद भी इस अमर बलिदानी का शव पहाड़ियों में नहीं ढूंढा जा सका।।
अदभुत पराक्रम एवं शौर्य तथा कर्तव्य के प्रति निष्ठां एवं रणभूमि में सर्वोच्च वीरता के प्रदर्शन के कारण मरणोपरांत इन्हें हिंदुस्थान का सबसे बड़ा सैनिक पदक "परमवीर चक्र" दिया गया।
विडंबना की बात ये भी रही की बिना आदेश मिले जहाज उड़ाने के कारण "कोर्ट आफ इन्क्वायरी" भी हुई जिसे मात्र एक खानापूर्ति तक सिमित रक्खा गया।
पाकिस्तानी पाइलेट "सलीम बेग मिर्जा" ,जिसने उनके विमान पर निशाना लगाया था, ने बाद में एक पुस्तक और कई स्थानीय आर्टिकल्स में निर्मलजीत सिंह सेखो के रणकौशल की भूरी भूरी प्रसंशा की।।
वायु सेना दिवस पर ऐसे सभी अमर बलिदानियों को श्रधांजलि एवं नमन।।

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