गुरुवार, 9 अगस्त 2012

बरेली दंगों मे हिंदुओं के दमन की कहानी पीड़ित हिन्दू की जुबानी

मित्रों,जैसा की पूर्व मे मैंने आप सभी से बतया था की दंगा प्रभावित क्षेत्रों एवं हिन्दू परिवारों से मिलने के लिए मै बरेली गया था। अब हिंदुओं पर होने वाले सुनियोजित दमन चक्र की परिस्थिति आप सब के सामने रख रहा हूँ ॥ 


3-4 अगस्त की रात्री  लगभग 2 बजे मै बरेली के सैटलाइट बस अड्डे पर पहुचा । शहर से आते समय ये आभास हो गया था की रात का कर्फ़्यू जारी है ॥ थोड़ी देर बाद जैसे ही बस अड्डा मैंने पार किया “मुल्ला यम सिंह यादव ”की सेकुलर पोलिस ने मुझे रोक लिया,मैंने उस समय एक टी शर्ट पहन रखा था जिसपर BEING HINDU लिखा था इसलिए मै स्वाभाविक रूप से अपराधी और आतंकवादी लगता थामुल्ला यम की पुलिस ने लगभग 25 मिनट तक पूछताछ की और बरेली आने का कारण जानना चाहा । असल कारण बताने पर मै या तो हिरासत मे लिया जाता या अगली बस  मे ठूस दिया जाता । अंततोगत्वा कोई रास्ता न दिखने पर मैंने एक अपने  से सम्बद्ध रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी का नाम बताया और ये समझाने के बाद उनसे मुक्ति मिली की बरेली और उत्तर प्रदेश की सीमा के आगे भी दुनिया है  ॥ खैर जैसे तैसे पास के होटल मे रात गुजारी ।
अगले दिन 4 अगस्त को  कुछ स्थानीय मित्रो की सहायता से दंगा पीड़ित हिन्दू परिवारों से मिलने का प्रयास किया मगर शायद सच सामने न आए इसका पूरा प्रबंध करते हुए मुल्ला यम की पुलिस ने किसी भी बाहरी की (विशेषकर जो हिन्दू हो) वहाँ प्रवेश बंद कर दिया था और उस दिन भी लगभग घरो से 18-20 हिन्दू उठाए गए थे ॥ उसी क्रम मे पुलिस ने मुझे भी वहाँ नहीं जाने दिया । शाम को मै अपने एक मित्र के फार्म हाउस पर बरेली से लगभग 30 किलोमीटर दूर आ गया और अगले दिन पीड़ित हिंदुओं से एक गोपनीय जगह पर मुलाक़ात किया ।
घटना-1
पहली घटना कुछ इस प्रकार है: 22 जुलाई को जल ले जा रहे शिव भक्त कावड़ियों पर अकारण ही भटके हुए मुस्लिम भाइयों ने  गोलाबारी की जिसमे कई हिन्दू घायल हुए और एक की मृत्यु हुई । घटना शाहबाद मुहल्ला
,मठ की चौकी,किला मे हुई ॥इसके बाद शहर मे धीरे धीरे कई जगह भटके हुए मुस्लिम भाइयों ने  आतंक फैलाना शुरू किया। उसी दिन प्रशासन ने कर्फ़्यू का आदेश दिया और कावड़ियों के डीजे चलाने पर रोक लगाने की एकतरफा कार्यवाही की । ध्यान रहे की डीजे और लाउडस्पीकर शिवभक्तों के ही बंद किए गए नमाज के समय लाउडस्पीकर पर कोई पाबंदी नहीं थी। इस घटना के विवेचना अधिकारी राजबीर सिंह हैं । कुछ पुलिस सूत्रों के अनुसार लखनऊ से संदेश ये आया है की “ज्यादा से ज्यादा हिन्दू फिलहाल जेल मे डाल दो तीन महीने बाद उनकी जमानत हो जाने दो,यदि मुस्लिम कही दंगा करता है तो सिर्फ हल्का बल प्रयोग पुलिस अपने बचाव मे करे । (दूसरा अर्थ ये है की हिंदुओं का घर जले तो पुलिस तमाश देखे )। एक और संदेश था की हिंदुओं की एफ़आईआर न लिखी जाए । कई हिन्दू जिनके घर जला दिये जो घायल थे उनकी एफ़आईआर तक नहीं लिखी गयी। .2-3 दिन लगातार यही क्रम रहा और भटके हुए मुस्लिम  भाइयों का आतंक जारी रहा ।हिंदुओं के घर जलाए गए महिलाओं से दुर्व्यवहार किया गया  जिसके सभी प्रमाण उपलब्ध हैं। इसी क्रम मे भटके हुए मुसलमान भाइयों ने हिंदुओं का दमन प्रशासन के सहयोग से जारी रखा । धीरे धीरे भटके हुए मुसलमान भाइयों की हिम्मत बढ़ती गयी और उनकी बंदूकों का मुह हिंदुओं के साथ साथ पुलिस थानो की ओर हो गया इस घटना मे पुलिस के दो उच्चाधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए । एक बार जब पुलिस की जान पर बन आई तो पुलिस ने अपनी नैसर्गिक प्रतिभा दिखते हुए, मुल्ला यम के आदेशों को जूतों पर रखते हुए भटके हुए मुसलमान भाइयों को रास्ते पर लाना शुरू किया इस क्रम मे 4 भटके हुए मुसलमान भाई अल्लाह को प्यारे हो गए ॥ इस प्रकार जो काम हिंदुओं को नहीं करने दिया गया उसे पुलिस ने अपनी जान बचाने के लिए किया,मतलब आतंक और आतंकियों का सफाया। (पुलिस और भटके हुए भाइयों के बीच झड़प की घटना का वीडियो उपलब्ध है)।
 जागो हिन्दू और प्रतिकार करो या
बहन बेटी का बलात्कार स्वयं देखने को तैयार रहो॥
“शांति नहीं क्रांति”


अब एक घटना 25 जुलाई की :”मुल्ला यम के राज्य मे गौपालक को भयंकर यातना”
स्थान: चकमहमूद पुराना बरेली शहर :यहाँ भटके हुए मुसलमान भाई लोग बहुसंख्यक है ।
यहाँ एक घर है श्री राम स्वरूप का जो हिंदुओं और मुसलमान भाइयों के मुहल्ले के मध्य या यू कह ले की सीमा रेखा पर पड़ता है । राम स्वरूप का पूरा नाम नहीं लिख रहा हूँ क्यूकी मै उन्हे सिर्फ हिन्दू रखना चाहता हूँ ब्रामहन
,क्षत्रिय,चमार,बनिया,ठाकुर या किसी और विभाजक शब्द मे नहीं बांधना चाहता। 
राम स्वरूप जी गौपालक है और इनके यहाँ 50-60 गायें और कुल मिलकर लगभग 100 पशु हैं जो इनकी आजीविका का साधन भी है । दंगे शुरू होने और कर्फ़्यू  लगने के लगभग 48 घंटे के बाद 25 जुलाई की सुबह लगभग 150 भटके हुए मुसलमान भाई हाथों मे असलहे लिए हुए हिंदुओं की घरों की ओर बढ़े । चूकी रास्ते मे पहला घर राम स्वरूप  का है और वो हर प्रकार से सम्पन्न भी है इसलिए स्वाभाविक रूप से निशाना वही थे । जैसे तैसे राम स्वरूप  एवं उनके पुत्रों वीरपाल
,राजवीर,एवं जगवीर ने उन्हे समझा बुझाकर वापस भेजा साथ ही साथ उन्होने थाना बारदारी के इंस्पेक्टर शशांक चौधरी को फोन करके हालत बिगड़ने की सूचना दी। मगर पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की इसी क्रम मे पूरे दिन 3-4 बार भटके हुए मुसलमान भाई हिन्दू घरो पर हमला करने के लिए जत्थों मे आते रहे उर धीरे धीरे दोनों ओर से पत्थर बाजी शुरू हो गयी ॥ आश्चर्यजनक रूप से भटके हुए मुसलमान भाइयों की संख्या कर्फ़्यू के बाद भी शाम तक 350 तक हो गयी। थाना बारदारी के इंस्पेक्टर शशांक चौधरी को बार बार फोन करने पर पर भी उन्होने यहाँ पुलिस बल भेजना आवश्यक नहीं समझा क्यूकी पुलिस  सहायता की मांग हिंदुओं की ओर से हो रही थी । शाम को 5 बजे की झड़प के बाद भटके हुए मुसलमान भाइयों ने पुलिस सहायता मांगी और लाभग 6.30 तक फोर्स वहाँ आ गयी थी । मुल्ला यम की फोर्स को देखते ही भटके हुए मुसलमान भाइयों का मनोबल बढ़ा और एक बार फिर लगभग 350 लोगो की भीड़ ने हिन्दू घरो पर हमला बोल दिया पहला घर रामस्वरुप का था अतः निशाने पर वही आया।  बाहर का गेट तोड़कर भटके हुए मुसलमान भाइयोंकी भीड़ घर मे घुस गयी और रामस्वरुप के घर मे लूटपाट करने लगी। रामस्वरुप ने ये सोचकर महिलाओं और बच्चो को घर के दूसरे कोने मे कर दिया की शायद भटके हुए मुसलमान भाई लूट पाट कर के चले जाए,मगर उन्होने आदतन हिन्दू महिलाओं पर अपनी मर्दानगी दिखाने  का प्रयास किया। उसी समय दोनों पक्षो से पथराव चालू हो गया और फायरिंग भी शुरू हो  गयी जब तक हिन्दू परिवार तबाह होते रहे पुलिस चुपचाप तमाशा देखती रही अचानक एक भटके हुए मुसलमान भाई नाम इरफान उर्फ नन्हें बाबू उमर 20-22 वर्ष को भीड़ मे किसी की गोली लगी और वो अल्लाह को प्यारे हो गए। तब पुलिस हरकत मे आई और बलवे को समाप्त कराया। पुलिस ने एकतरफा कार्यवाही करते हुई लगभग 20 हिन्दू परिवारों को उठाया और अंततः 302 का मुकदमा रामस्वरुप और उसके बेटे पर कर पूरे परिवार को जेल के अंदर कर दिया।
पुलिस के वाहियात तर्क के अनुसार रामस्वरूप के घर से इमरान की चुनावी रंजिश थी अतः ये हत्या हुई । शासन के निर्देश पर तुष्टीकरण करते हुये कई फर्जी धाराएँ लगा दी गयी और चार्जशीट मे जितनी देरी हो सके उतना करने का आदेश है पुलिस को । 
अब कुछ और प्रश्न और तथ्य पुलिस से
1 जब सैकड़ों लोगो के बीच गोलाबारी और पत्थर बाजी हो रही थी तो पुलिस कैसे कह सकती है की गोली किसने चलायी।
2 मृतक इमरान घटनास्थल से 15 किलोमीटर दूर ग्राम बालीपुर का मूल निवासी है जबकि पूरे बरेली मे घटना के दो दिन पहले से कर्फ़्यू लगा था तो वो 15 किलोमीटर क्या नमाज पढ़ने या इबादत करने आया था॥


3 एक बात ये भी है की दंगों मे कर्फ़्यू के दौरान पुलिस ने भटके हुए भाइयों को 15 किलोमीटर दूर जाने छूट दे दिया
?? ऐसाक्यू??जबकि दंगे के 10 दिन बाद भी मुझे बस स्टैंड से 100  मीटर पर ही रोका गया 

4 किसी ने कहा की वो अपने खाला या भाईजान से मिलने भी जा सकता है इससे वाहियात तर्क क्या होगा क्या दंगे मे कोई अपने अब्बाजान  से भी मिलने जाएगा यदि किसी की मृत्यु न हो रही हो
???? 


4 मृतक की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के अनुसार गोली लगने और निकलने के स्थान पर एक सुराख है जबकि 315 बोर राइफल (जो रामस्वरुप के घर है) से गोली लगने पर आगे सुराख होता है और गोली दूसरे सिरे से निकलने वाले हिस्से को फाड़ कर निकलती है ।
इस प्रकार पूर्ण रूप से हिंदुओं पर एकतरफा दमन करते हुए इस गौपालक परिवार को यदुवंशी मुल्ला यम जो शायद अब कंस  का रूप बन चुके हैं ,के राज मे जेल मे डाला गया है ॥ पीड़ित हिंदूओ के नाम
1 श्री राम स्वरूप (
70))पुत्र श्री होरीलाल
2 श्री वीरपाल (42) पुत्र श्री राम स्वरूप
3 श्री राजवीर (28) श्री राम स्वरूप
4 श्री जगवीर(25)  श्री राम स्वरूप
शासन से माननीय शिवपाल सिंह यादव बरेली गए मगर मुलाक़ात किया सिर्फ मुस्लिम परिवारों से हिन्दू परिवार उसी रास्ते मे थे मगर उन्होने उनसे मिलने की जरूरत नहीं समझी क्यूकी हिन्दू औरतें होती ही है भटके हुए मुसलमान युवको की हवस पूर्ति के लिए ॥
इनके परिवार के एक सदस्य वीरेंदर सिंह जो उस दिन आसाम मे थे जेल से बाहर हैं और पुलिस उन्हे किसी अन्य धारा मे अंदर करने की फिराक मे है...
श्री राम स्वरूप का प्रयास एक निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग कर रहा है जिससे हिन्दू  परिवारों को न्याय मिल सके आप सभी से अनुरोध है अपने स्तर पर सीबीआई या सीबीसीआईडी जांच के लिए प्रयास  करे॥ 
जागो हिन्दू और प्रतिकार करो या
बहन बेटी का बलात्कार स्वयं देखने को तैयार रहो॥
“शांति नहीं क्रांति”

10 टिप्‍पणियां:

  1. काफी देर हो चुकी है ,१० सालो में ये मुस्लिम देश में बहुसंख्यक हो जायेगे

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    1. सहमत नहीं हूँ ॥ अब हिन्दू जबाब देना सीख गया है ॥ उदाहरण बरेली के बाहरी गाँव है जिसका विवरण यहा नहीं देना चाहता

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    2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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    3. सहमत नहीं हूँ ॥ अब हिन्दू जबाब देना सीख गया है ॥ उदाहरण बरेली के बाहरी गाँव है जिसका विवरण यहा नहीं देना चाहता yadi esa hai to achha hai

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  2. Ham hinduo ko mandiro me paise chadhane ki bajaay waha ki zarurate puree ho aisee vyavastha kare aur Paiso ko jama kar ke har hindu ghar me shastro ki suvyavstha kare....aur apne bacho ko aur swayam ko aakramak banaaye...kyoki "shree krishna ne Geeta me kaha hai " dosh nahi dushta dalan me ".....!!!!

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  3. Ham hinduo ko mandiro me paise chadhane ki bajaay waha ki zarurate puree ho aisee vyavastha kare aur Paiso ko jama kar ke har hindu ghar me shastro ki suvyavstha kare....aur apne bacho ko aur swayam ko aakramak banaaye...kyoki "shree krishna ne Geeta me kaha hai " dosh nahi dushta dalan me ".....!!!!

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  4. कुछ भटके हुए भाई भटकते हुए पाकिस्तान में परमाणु बमों के ठिकाने पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, न्यूज़ आ रहे हैं|

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  5. THAT IS WHY I SAY
    HINDUS MUST UNDERSTAND
    ISLAM IS OF THE DEVIL
    ISLAM IS FOR THE DEVIL
    DESTROY ISLAM
    OR
    GET DESTROYED BY IT

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  6. Hamare Desh Me in Mullo K Samarthak bhaut jayada hai .... Sb akele pad jate hai ... SP or Congress to jese in mullo ki hi sarkar hai ... par galti bi hamari hai. hum hindu tukdo me baithe huye hai .. BJP right choice hai esa lag rha hia . par Ram Mandir ka jo haal huaa tha vo bi sb jante hai .... In baato ko soch kr Jism me aag si lag jati hai ... Pa

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  7. iin भटके हुए मुसलमान भाईyo ke pichwade me goli mar deni chahiye ya unko handicap kar unko seekh deni chahiye

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