रविवार, 18 दिसंबर 2011

पाकिस्तानी हिन्दुओं की हिन्दुस्थान में दुर्दशा -हिन्दू होने का अपराध


अमेरिका और पोप शासित इण्डिया में  जहाँ ११० करोड़ हिन्दू जनसँख्या है,हिन्दुओं का दमन और उन पर अत्याचार कभी सुर्खियाँ नहीं बन सकता, मगर बात अभी पाकिस्तान से आये १५० हिन्दुओं की है जो हिन्दुस्थान में दर दर भटक रहें हैंपिछले माह पाकिस्तान से १५० हिन्दू तीर्थयात्रा पर आये थे मगर अब ये हिन्दू हिन्दुस्थान से वापस जाने के लिए तैयार नहीं हैऔर यहाँ स्थायी रूप से शरण मांग रहें हैंइसके पीछे पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं पर होने वाला बर्बर अत्याचार हैआये हुए हिन्दुओं के अनुसार पाकिस्तान में उन्हें कभी जजिया कर तो कभी मुश्लिम बनने का दबाव,हत्या ,लूट और फिरौती का दंश झेलना पड़ता था हिन्दू लड़कियों के बलात्कार और बलात मुश्लिम बनाने की घटनाएँ अब आम हो गयी हैये बात पाकिस्तान की सरकार, संसद और मानवाधिकार संघठन भी स्वीकार करने हैंइसके पक्ष का आकड़ा एक ये भी है की विभाजन के समय पाकिस्तान में २५% हिन्दू थे जो अब १.५% के आस पास रह गए हैंखैर ये बात तो पाकिस्तान में होने वाले अत्याचार की हुई जहाँ पाकिस्तानी का मतलब मुसलमान और हिन्दू विरोधी  होना ही होता है,और ये उनके देश का आन्तरिक मामला है उसपर हम एक सीमा से ज्यादा हस्तक्षेप नहीं कर सकते
हिन्दुस्थान (जिसे खान्ग्रेस सरकार ने पोप पोषित इंडिया बना रखा है) में आये हुए पाकिस्तानी हिन्दुओं के साथ होने वाला व्यवहार भी उन्हें अपने यहाँ चलने वाले तालिबानी शासन की ही याद दिलाता हैये १५० हिन्दू जिनमें बच्चे बुजुर्ग महिलाये भी शामिल है इन्होने दिल्ली में शरण ली हैकुछ छोटे स्वयंसेवी संघठनो और इक्का दुक्का समाज सेवको के अलावा कोई भी उनकी सुध लेने वाला नहीं हैखान्ग्रेस अपनी हिंदुविरोधी नीतियों और तुष्टिकरण के कारण इन हिन्दुओं को वापस पाकिस्तान भेजने के लिए अपना पूरा जोर लगा रही हैइन हिन्दुओं की हिन्दुस्थान में शरण पाने की याचिका भी सरकार ने जानबूझकर विचाराधीन रखा हैइसी बिच एक हिन्दू संघटन ने इन्हें उत्तर प्रदेश में शरण दिलाने की कवायद  की तो यू पी पुलिस ने उन्हें रात मे ही मार पिट कर दिल्ली भगा दियाखैर कांग्रेस से हिन्दू विरोध की ही उम्मीद की जा सकती है क्यूकी इस पार्टी का इतिहास ही है तुष्टिकरण का हैसबसे कष्टप्रद बात ये है की इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संघठन को लकवा मार गया है और भरतीय जनता पार्टी जैसी राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का झंडा उठाने वाली पार्टी ने इस मुद्दे पर कोई पहल करने की जरुरत नहीं समझीहिन्दू  हृदय सम्राट की पदवी पाए हुए माननीय नरेन्द्र मोदी जी भी चुप हैइसका कारण क्या है??
आगामी चुनावों को देखते हुए मुश्लिम वोट बैंक की खातिर राजनितिक पार्टियाँ इन हिन्दुओं को जबरिया पाकिस्तान भेजने से भी गुरेज न करेहाँ अगर ये लोग मुश्लिम होते तो खान्ग्रेस से लेकर भाजपा सब पार्टियों में ईनको हिन्दुस्थान में शरण दिलाने की होड़ लग जाती शायद भारत सरकार को शरणार्थी नीति पर भी एक स्पष्ट रुख अख्तियार करना चाहिएकितना शर्मनाक है की हिन्दुस्थान में ६ करोड़ जेहादी बांग्लादेशियों को बसाने में खान्ग्रेस सरकार को सोचने में जरा भी समय नहीं लगता और सिर्फ १५० हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा हैअसम का उदाहरण ले तो रातो रात ट्रक में बैठकर बंगलादेशी आते है और अगले दिन तक जंगल के जंगल गांव में तब्दील। न कोई शरण देने का झंझट न कोई निरीक्षण..इसका कारण है की वो मुश्लिम है..वो एक वोट बैंक है
इस परिस्थिति में हिन्दुओं को भी आत्म मंथन करने की जरुरत क्या हिन्दुस्थान का हिन्दू इतना निरीह हो गया है की ११० करोण हिन्दू मिलकर १५० भाई बहनों को शरण न दे सके? शायद हम हिन्दुओं की आंतरिक फूट ,तथाकथित सेकुलर होने की होड़ और खान्ग्रेसियों के तलवे चाटने वालों की हिमायत करने की प्रवृत्ति इस का कारण हैकल्पना करे अफजल गुरु के लिए होने वाले विरोध प्रदर्शनों का,देशद्रोही होने के बाद भी एक बड़ा तबका उसे आदर्श मानता हैवैश्विक स्तर पर मुश्लिम लादेन के प्रबल समर्थक भी है मगर अब दूसरी और हिन्दुस्थान में हिन्दू ही कर्नल पुरोहित और प्रज्ञा ठाकुर को आतंकी बता कर अपनी बौधिक चेतना के दिवालियेपन और हिन्दुओं की नपुंसकता का परिचय देते रहते है
अगर अब भी हिन्दुओं ने नपुंसकता नहीं छोड़ी तो आज १५० पाकिस्तानी हिन्दू दर दर  भटक रहें है कल ११० करोड़ हिन्दुस्थान के हिन्दू आतंकी घोषित कर दिए जायेंगे और बाबर और मीर जाफर की औलादे इस देश पर शासन करेंगीऔर हम अपनी संस्कृति और धर्म के मुगालते में रहते हुए "गर्व से कहो हम हिन्दू है" की छद्म गाथा गाते रहेंगे
आप सभी से अनुरोध है आप जहा कहीं भी हो संवैधानिक मर्यादा में रहते हुए एक पत्र माननीय प्रधानमंत्री जी,राष्ट्रपति जी,अपने जनप्रतिनिधिया जिलाधिकारी किसी को भी किसी माध्यम से,इन हिन्दुओं की सहायता के लिए, लिखें और उन हिन्दुओं की सहायता के लिए प्रयास करते हुए समाज और हिंदुत्व के लिए अपना कर्तव्य पूरा करने की कड़ी में एक छोटा सा प्रयास करें

9 टिप्‍पणियां:

  1. सवैंधानिक मर्यादा में तो ये लेख ही नहीं लिखा गया, सरकार को पत्र क्या लिखें? शरणार्थियों की हमदर्दी जताते वक्त मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलने की जरुरत नहीं है | सरकार आपकी अपनी है पाकिस्तानी मुसलमानों की नहीं है | यदि बाग्लादेश और पाकिस्तान में गरीब खुश होते तो वे हिन्दुस्तान तो क्या कहीं भी न जाते |

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  2. इन्हें रोका जाना चाहिए. शब्द चाहे कितने भी अमधुर क्यों न हों. मर्यादा पुरुषोत्तम अब नए रूप में अवतरित हों गए हैं, मर्यादा बताने के लिए.

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  3. बाग्लादेशी मुसलामानों से तो वोट मिलते हैं| वोट बैंक बचाना सरकार का पहला उद्देश्य है, देश जाए भाड़ में| और इनकी तो संख्या भी ६ करोड़ है| इनके सामने १५१, वे भी हिन्दू किस काम के? जीयें या मारें इनकी बला से, किसी को क्या फर्क पड़ता है? खुद हिन्दुओं को ही कुछ नहीं पडी है| आज वे सुरक्षित जो हैं| कल भगवान् न करे, इन शरणार्थियों जैसी हालत इनकी होगी तब नींदें खुलेंगी|
    अभी तो हिन्दू क्रिसमस और न्यू इयर के नशे में हैं|
    Come on HINDUS, Lets Enjoy...
    इसके अलाव अब हम किसी काम के नहीं रहे|

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  4. इनके लिए बस एक ही शब्द मायने रखता है वोट ..... यह सब खेल भी उसी के लिए है ...

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  5. दिवस भाई.भरिय नागरिक,मोनिका जी..आभार आप का
    @अमरनाथ 'मधुर' जीकृपया बताएं कहाँ मुसलमानों के खिलाफ गलत लिखा है मैंने...हाँ बात हिन्दुस्तानी मुसलमानों की कीजियेगा..जेहादी पाकिस्तानियों और बंगलादेशियों की नहीं...हाँ हिन्दुस्थान के सन्दर्भ में जो लिखा है उसमे गलत क्या है ये भी बताएं??आप के प्रतिउत्तर की प्रतीक्षा रहेगी..

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  6. jo jis desh me rah raha hai use wanha ki sarkaar ke saath taar tamya bana kar hi rahna hoga , agar kisi desh main kisi prkaar ka anyaya hota hai to wishva star par sanstha bani hui hai , jo aise maamle dekhti hai . hame agar apne desh main kisi ka dakhal pasand nahi to doosra desh bhi yahi chahega ....??

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  7. ashutosh ji aapki soch acchi hai par mai to ye kahuga ki wo chahe hindu ho ya musalman jo meri mitti ka nahi wo mera nahi .......meri jameen ko chhod kar jane wala mera nahi hai ......jab mere ghar me mera bhai bhukha hai chae wo mujhse naraj hi kyu na ho tab tak mujhe koi haq nahi ki mai padosi ki madadt karu ... jai hind

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  8. अशोक जी ,
    आभार आप का ब्लॉग पर आने एवं अपने विचारो को साझा करने के लिए..चलिए आप की बात मानी जो आप आप की मिटटी का नहीं वो आप का नहीं..मगर जो आप की मिटटी का खाते हैं और पडोसी की गाथा गाते है उनका क्या???
    पड़ोसियों की मदद तो सन ४७ से करते आ रहें हैं,,मगर बात हिन्दुओं की है तो ऐसे ख़यालात आना लाजमी है..
    जो आसाम त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में शरणार्थियों के साथ हो रहा है वो मदद के साथ साथ AK47 भी ले कर आता है...
    वैसे भी हमारे धर्म में विभीषण को राम ने शरण दी थी..तो धर्म भी यही सिखाता है की खुद भूखे रह जाओ मगर याचक खाली न जाये...
    जिन नाराज छोटे भाइयों की और आप का इशारा है वो खुश तभी होंगे जब तिरंगे की जगह चाँद तारा हो...और हर घर के ऊपर एक लाउडस्पीकर.
    बहुत बहुत आभार विचार साझा करने का

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  9. सहमत हूँ आपकी बात से ... भारत सरकार को जगाने का प्रयास और इनको भारत में स्थापित करने का प्रयास सभीको मिल के करना चाहिए ...

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