रविवार, 7 अगस्त 2011

हिना रब्बानी खार का भारत दौरा या भारतीय बिदेशनीति का निकृष्ट आत्मसमर्पण..

पिछले दिनों पाकिस्तान की बिदेश मंत्री हिना रब्बानी खार की बिदेश यात्रा का बहुत धूम धड़का रहा भारतीय सत्ता के गलियारों  से लेकर मीडिया तक..हिना रब्बानी खार ये नाम पाकिस्तान की राजनीती में तब सुर्ख़ियों में आया जब इन्हें १९ जुलाई को पाकिस्तान का विदेश मंत्री बनाया गया..हिना पाकिस्तान की सबसे कम उम्र की बिदेश मंत्री बनने का गौरव प्राप्त है..अमेरिका से होटल मैनेजमेंट की पढाई करने वाली हिना पाकिस्तान के पंजाब के पूर्व गवर्नर गुलाम मुस्तफा खार की भतीजी है...हिना को अचानक जब पाकिस्तान में बिदेश मंत्री बनाया गया तो पाकिस्तान स्थानीय राजनीति में भी इसका विरोध हुआ की एक अनुभवहीन महिला को इतनी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है...मगर उनके परिवार के राजनैतिक अनुभव का हवाला देकर हिना की ताजपोशी की गयी...ये भी अजीब संयोग है की बिदेशमंत्री बनने के तुरंत बाद हिना की हिन्दुस्थान यात्रा घोषित हो गयी..वर्तमान हालात में पाकिस्तान की राजनीति की बात करें तो महिलाएं राजनीति में अपने दमखम से कम ही आती हैं अपितु उनका वहां की सेना और सत्ता के प्रतिष्ठान अपनी सुविधा अनुसार मनोनयन करते हैं..शाह महमूद कुरैशी से फरवरी 2011 में विदेश मंत्रालय वापस लिए जाने के बाद पाकिस्तानी सेना को एक ऐसे चेहरे  की तलाश थी जो रिमोट कंट्रोल से पाकिस्तानी सेना द्वारा निर्धारित नीतियों को राजनयिक चोला ओढ़कर पड़ोस एवं बाकी दुनिया में फैलाये..खैर भारत में भी परिस्थितयां इतर नहीं है आज कल बस स्वरुप बदला है वहां की  बिदेशमंत्री सेना के मनोनयन पर मनोनीत हुई  थी तो हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री समेत समूचा मंत्रिमंडल एक बिदेशी  महिला के मनोनयन पर उसकी मर्जी के अनुसार कार्य कर रहा है.... 
अब जरा बात करें हिना के हिन्दुस्थान दौरे की तो भारत के इतिहास में विदेशनीति का इससे बड़ा मजाक आज तक नहीं हुआ होगा..पहले हमारे प्रधानमंत्री समेत समस्त नेतागण हर बम बिस्फोट के बाद ये कहते नजर आते हैं की पाकिस्तान से तब तक बातचीत नहीं होगी जब तक वो आतंवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करेगा...फिर जैसे ही अमेरिका मैडम के कान उमेठता है तो हमारे प्रधनमंत्री जी को भारत मिलाप की याद आने लगती है...
मैंने अपने एक पूर्व के लेख में लिखा था की पाकिस्तान में ये आम धारणा  है की भारत में मार काट मचाओ कुछ दिन बाद भारत खुद बी खुद बातचीत के लिए आगे आएगा..क्युकी अफगान पाक सीमा पर अमेरिका की दुखती राग पाकिस्तानी सेना के हाथ में है..
अब अगर दौरे की बात करें तो हिना के दौरे में भारत सरकार की ओर से सिर्फ ये कहा गया की अगर हो सके तो अलगाववादियों से न मिले..और हिना ने भारत में पांव रखते ही जैसे भारत सरकार  के मुहं पर तमाचा मारते हुए सारे कश्मीरी आतंकवादियों को भारत की सरकार से उच्च स्थान देते हुए नई दिल्ली में मुलाकात की...आखिर एक राजनयिक दौरे में आतंकवादियों से मिलने का क्या अर्थ  निकाला जा सकता है..शायद पहले ही दिन हिना ने अपने तेवर से बता दिया की उसका हिन्दुस्थान दौरे का मकसद कश्मीर के अलगाववादियों को समानांतर सरकार के बराबर मान्यता देना है जो की पाकिस्तानी सेना ओर आई  एस आई का खुला अजेंडा है पिछले ६० सालो से.. यासीन मालिक तो पाकिस्तान में मिल आया था मोहतरमा से अब बचे मीरवाइज उमर फारुख और सैयद अली गिलानी उन्होंने भारत में भारत विरोधी अजेंडे को मनमोहन सरकार की नाक  के निचे आगे बढाया..भारत की अमेरिकापरस्त सरकार की छीछालेदर देखिये की वो भारत में ही पाकिस्तान जैसे पिद्दे देश के कठपुतली अनुभवहीन बिदेशमंत्री की एक आतंकवादियों से मुलाकात तक नहीं रुकवा  पाई..ये देखकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का शर्म अल शेख में नाक कटवाने  वाली गलती याद आ गयी जब उन्होंने पाकिस्तान की मक्कारी और अमेरिका के दबाव में आ कर बलूचिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप की बात मान ली थी..उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पाक सेना की कठपुतली ने हिन्दुस्थान की रही सही बिदेशनीति का पिंडदान कर डाला...
हिना ने इसके बाद एक रटा रटाया वक्तव्य दिया की पुरानी बातों को भूलना होगा...और शायद नए हमलों के लिए तैयार रहना होगा...बातचीत में कहीं भी आतंवाद पर ठोस सहमती और आतंकी कैम्पों को पाक से हटाने के बारे में कोई सहमती नहीं बनी...और हिना ने जो थोड़ी बहत बातचीत की भी वो भी पाकिस्तान में ओसमा के मारे जाने के बाद बनते हुए पाक विरोधी माहौल पर पानी डालने का प्रयास मात्र है..
जब हमारे देश के हिजड़े  नेता और शासक हिना रब्बानी जैसे कॉल गर्ल के आवभगत में लगे थे और ये भांड मीडिया उसके पर्स और सेक्स सिम्बल की बात कर रही थी ठीक उसी समय  आतंकवादियों ने 20 कुमाऊं रेजिमेंट के दो जवानों की हत्या करके उनके सिर काट कर  अपने साथ पाकिस्तान ले गए ताकि अपनी क्रूरता एवं भारत सरकार की नपुंसकता पर जघन्य अट्टहास कर सके ...
सरकारी मशीनरी अगर अफजल और कसब को बिरयानी परोसते तो वो दिन दूर नहीं जब पाकिस्तानी हिन्दुस्थानियों का सर लाल किले पर लगायेंगे और प्रधानमंत्री मेडम मेडम गायेंगे...
 क्या विडंबना है की पाकिस्तान दौरे पर जाते समय हमारे अडवाणी जी जैसे राष्ट्रवादी जिन्ना के गुणगान गाते है मगर हिना रब्बानी जैसी कठपुतली यहाँ आ कर आजाद कश्मीर की हिमायत कर भारत को खंडित करने की बात करती है और नपुंसक सरकार आवभगत में लगी हुई  होती है..
मीडिया की बात करना निरर्थक  और हास्यास्पद है क्यूकी बिदेशी हाथो में बिकी हुए मीडिया से आप इतनी ही उम्मीद कर सकते हैं की वो हिना रब्बानी को बतौर माडल और सेक्स सिम्बल पेश करे और उनके कपड़ों से लेकर पर्स तक के मूल्य का विश्लेषण करे..हाँ अगर इन सबसे समय मिल जाये तो बाबा रामदेव की संपत्ति का गुणाभाग कर ले ...
पाकिस्तान की बिदेशनीति या यूँ कह ले राजनीति का निर्धारण वहाँ की सेना करती आई है ये सर्वविदित है..मगर विगत १० बर्षों की बात करें तो हिन्दुस्थान ने अपनी पूरी बिदेशनीति अमेरिका के यहाँ गिरवी रख दी है और अमेरिका की शह पर पाक आये दिनों बम फोड़कर हिन्दुस्थान की नपुंसक होती जा रही सरकार को उसके घर में घुसकर ललकारते हैं ..मगर शायद हमारी सरकर को कश्मीर और पाकिस्तानी आतंकवादियों पर कार्यवाही करने के तुलना में रामलीला मैदान में बेगुनाहों पर अत्याचार करना ज्यादा सहूलियत भरा कदम लगता है...शायद ये भी भारत की अमेरिका द्वारा संचालित नीति का एक हिस्सा हो जो इटली की माफिया के हाथों पूर्ण कराया जा रहा हो..