सोमवार, 27 जून 2011

प्रणव वार रूम लीक- कांग्रेस में होता शक्ति विकेंद्रीकरण ???

कुछ दिनों से मीडिया में दबी जबान से वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के दफ्तर में की गयी जासूसी प्रकरण चर्चा में है...राजनैतिक गलियारों और सरकार के लिए भी ये घटना गले की हड्डी बनता प्रतीत हो रहा है... खबर ये हैं की च्युइंगम जैसी कोई  चीज वित्त मंत्री के कार्यालय में कई जगहों पर चिपकी पाई गयी..प्रणव दा ने इसकी शिकायत कुछ माह पूर्व प्रधानमंत्री से की और अपुष्ट ख़बरों के अनुसार उन्होंने  इशारों इशारों में माननीय गृहमंत्री चिदम्बरम जी को निशाने पर ले लिया इस जासूसी कांड के लिए..ये वही चिदम्बरम हैं जिन्हें दिग्विजय सिंह "घमंडी" होने तक का विशेषण दे चुके हैं..

अगर इसका राजनैतिक परिदृश्य में विश्लेषण करें तो ये जासूसी कांड से ऊपर १० जनपथ की सरकार पर ढीली पड़ती पकड़ की और भी इशारा करता है..अगर कांग्रेस का इतिहास देखें तो मुख्यतः यह एक परिवार केन्द्रित दल ही रहा है..जब जब किसी ने इस शक्ति के केन्द्रीकरण को तोड़ने की कोशिश की वो पार्टी विभाजन या उस व्यक्ति विशेष के प्राणाहुति के चरम तक भी पहुच गया...

उदाहरण में शरद पवार और पी ए संगमा है जिन्होंने गाँधी नेहरु परिवार का विरोध किया और परिणाम कांग्रेस विभाजन तक जा पहुंचा..इंदिरा जी के समय घूस लेकर आयत लाइसेंस के मुद्दे पर जब तत्कालीन इंदिरा सरकार के मंत्री ललितनारायण झा के इंदिरा जी के खिलाफ मुह खोलने का शक हुआ तो समस्तीपुर (बिहार) में उनको मंच समेत ही बम से उड़ा दिया गया...यह एक राजनैतिक हत्या थी मगर हर मामले की तरह इसे भी दबा दिया गया और शायद अब सामान्य ब्यक्ति को ये संज्ञान भी न हो.....

बात कांग्रेस में  सत्ता के विकेंद्रीकरण की हो  तो हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव जी ने इसमें सफल रूप से ५ सालो तक निर्बाध अभियान चलाया और पार्टी में अपनी जगह और अपनी जान दोनों बचाने में कामयाब हुए..हलाकि नरसिम्हाराव जी सोनिया की ही पसंद थे मगर सत्ता की बागडोर हाथ में आते ही उन्होंने सर्वप्रथम १० जनपथ के पर कतरने शुरू किये और यदा कदा राजीव जी के समय हुए घोटालों का डर दिखाकर १० जनपथ के रिमोट  कंट्रोल की बैटरी को मृत करने में विशेष योगदान दिया..हाँ विपक्ष के हो हल्ले के बाद भी राजीव गाँधी फाउन्डेसन को ८-१० करोण रूपये नरसिम्हाराव जी १० जनपथ के खर्चे के लिए दे दिया करते थे...

कालांतर में नरसिम्हाराव सरकार  के कारनामों के कारण गेंद एक बार फिर १० जनपथ के पाले में आई और २००४ में सोनिया गाँधी एक बड़ी राजनैतिक शक्ति के रूप में उभरी और वाम मोर्चे के सहयोग से सरकार बनाने और प्रधानमंत्री पद तक पहुचने का रास्ता खुल गया..उस समय सोनिया गाँधी ने बिदेशी मूल के उठते मुद्दे को शांत करने के लिए मनमोहन सिंह का चुनाव कर लिया..

खुद दौड़ से हट कर उन्होंने विपक्ष और खुद की पार्टी में मुखरित होते बिदेशी मूल के मुद्दे की हवा निकल दी ,त्याग का सन्देश भी जनता में गया और सबसे महत्त्वपूर्ण युवराज(राहुल गाँधी) की भविष्य में  महाराज(प्रधानमंत्री) बनने की दावेदारी का रास्ता साफ करा लिया...

चूकी नरसिम्हाराव जैसे राजनैतिक व्यक्ति को चुनकर एक बार सोनिया ने अपने हाथ जला लिए थे अतः उस गलती से सबक लेते हुए उन्होंने प्रणव मुखर्जी ,चिदंबरम और कई वरिष्ठ जनाधार वाले  कांग्रेसियों को ठिकाने लगते हुए लोकसभा का चुनाव भी न जीत पाने वाले अपेक्षाकृत गैर राजनैतिक व्यक्ति मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बना दिया..इससे मूल सत्ता पर गाँधी परिवार  का नियंत्रण बना रहा और सिखों को भी एक मानसिक संतुष्टि देने का प्रयास किया जो सिख दंगो के कांग्रेसी जख्म आज तक ले के घूम रहें हैं..

यूपीऐ-१ तक सब ठीक ठाक रहा...ये भी बात दीगर है की आज तक के हुए भारत के प्रधानमंत्रियों में अमेरिका के सबसे बड़े चहेते के रूप में माननीय मनमोहन सिंह जी उभरे हैं..यहाँ तक की अमेरिका के शरणागत होते हुए परमाणु संधि मुद्दे पर अपनी सरकार की भी बलि देने को तैयार हो गए...अब यूपीऐ-२ में कई समूह बन गए हैं एक अमेरिकापरस्त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ,कपिल सिब्बल,चिदंबरम का ग्रुप दूसरा प्रणव दा का धडा जिसमें यदा कदा दिग्विजय सिंह चिदम्बरम जैसों को ठिकाने लगाने के लिए साथ हो लेते हैं..तो एक तरफ १० जनपथ है जो इस विवाद में सत्ता पर ढीली होती पकड़ से चिंतित है..उन्हें प्रणव में तारणहार भी दीखता है और उनका बढ़ता कद युवराज की ताजपोशी के आड़े भी आ रहा है तो दूसरी और प्रणव दा के दफ्तर की जासूसी को हरी झंडी दे दी जाती है...साथ ही साथ दिग्विजय जैसे स्वामिभक्त युवराज को प्रधानमंत्री बनाने का राग अलाप कर मनमोहन -चिदंबरम को ठिकाने लगा रहें हैं..इसी क्रम में उनका चिदंबरम को "घमंडी" बताने का वक्तव्य भी शामिल हो जाता है...

अब इस भेडचाल में सब अपने अपने रस्ते और निष्ठाओं के अनुसार मलाई खाने और स्वयं की सुविधा के अनुसार निर्णय लेने में लगे हैं...कभी ४ मंत्री मुह उठाये बाबा से मिन्नतें करने जातें जाते हैं..तो कोई होटल बुलाता है....तभी उनको ठिकाने लगाने के लिए दूसरा धडा उसी दिन निर्दोष लोगों पर लाठियां और गोली चलाने को हरी झंडी दे देता है..इन सबके बिच १० जनपथ अपने ही मंत्रियों के कुकर्मों से बचते हुए ये कहकर छुट्टियां मानाने चला जाता है की उसे इस घटना की जानकारी नहीं हुई..  आने के बाद सारी संगठनात्मक  मशीनरी युवराज को प्रधानमंत्री के रूप में लांच करने में झोंक दी जाती है की चुनाव के समय आदर्श से लेकर 2G , लोकपाल से रामदेव, कलमाड़ी से राजा या विभिन्न कुकर्मों का ठीकरा मनमोहन जी के सर पर फोड़कर सजास्वरुप नए प्रधानमत्री युवराज राहुल गाँधी के नाम का एलान कर देना...फिर वही पुनरावृत्ति की कोशिश सत्ता भी हाथ में, गाँधी परिवार विरोधी ठिकाने और जनता को नए युवराज से उम्मीद का झुनझुना....

इन सबके बिच अगर समय मिला तो जासूसी करा लेते हैं अपने मंत्रियों का ..ये एक सोचने का विषय है की अब वित्त मंत्रालय जैसे विभाग जासूसों की पहुच में हैं..क्या इसका कोई सम्बन्ध कालेधन से है??? क्या प्रणव मुखर्जी की इमानदार कोशिश पर कालेधन के पहरेदारों ने पहरा लगाया ?? या सरकार को कितने लाख करोण का चूना भ्रष्ट मंत्रियों ने लगाया इसकी जासूसी की जा रही थी...

यहाँ एक संभावना ये भी बनती है की ये जासूस बिक जाएँ और वो कागजात आई एस आई या  सी  आई ऐ के हत्थे लग जाये...कौन करा रहा है ये जासूसी ये यक्ष प्रश्न है??क्या कोई बिदेशी एजेंसी ,कोई बड़ा  कार्पोरेट , चिदम्बरम या स्वयं १० जनपथ....हिन्दुस्थान की जनता जबाब चाहती है....
बाबा का कालाधन खोजने वाली सरकार,तथाकथित बुद्धिजीवी , मीडिया सब खामोश है ,क्या प्रणव मुखर्जी के दफ्तर से मिलने वाली च्युइंगम पचा लिया सबने ..... क्या १० जनपथ की हरी झंडी मिलने का इंतजार हम तब तक करेंगे जब तक देश बिक न जाये???


26 टिप्‍पणियां:

  1. desh ke bikne ki aapko chinta hai aur iske liye aap matr congress ko doshi thahra rahe hain yadi aashutosh ji aisa hona hota to bahut pahle ho chuka hota kyonki satta congress ke hatho me hi bahut lambe samay se hai.sharad panvar aur sangme jaise netaon ki kya kahen don hi apne rajnitik hit ko dekh vahin hain jahan se hate the.

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  2. ऐसे अनगिनत सवाल है जो अनुत्तरित हैं..... यह इस देश का दुर्भाग्य है....

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  3. इस ओर तो मेरा ध्यान गया ही नही था वैसे मेरी नजर मे प्रणव दा के लिये आज भी सम्मान है उनका चरित्र इन चोरो से अलग है शायद इसीलिये ये चोर उनकी जासूसी करा रहे होंगे

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  4. बहुत ही गम्भीर मसला है. लेकिन इसकी न तो जांच हो पायेगी और न ही दोषियों के नाम सामने आ पायेंगे.

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  5. कौरवो की सेना में अच्छे लोगो का होना कौरवों को अच्छा नहीं बना देता, बुरो के साथ मौन खड़े होने से भी बुरे में आपकी सहमती मानी जाती है, भीष्म जैसे महान लोग भी इससे दोष से नहीं बच पाते, प्रणब दा तो फिर भी कांग्रेस के कृपाचार्य हैं. रही बात देश बिकने की तो वो तो संभव ही नहीं, हाँ देश के लोग और उनकी मेहनात, ईमान और आज़ादी जरूर बेचीं जा रही है...

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  6. desh ka kharaab haal hai bahut ... daldal mein pair hain sab netaaon ke ... bhrasht ...

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  7. जय च्युइंगम- सरकार की .
    बार -बार झूठ बोलने से सच को ही ताकत मिलती है .दरअसल वर्तमान केन्द्रीय सरकार मजबूरी में ही सही इतने झूठबोल चुकी है कि कोई उनके सच पर विश्वास नहीं करता .यहाँ तक के सरकार होने का सच भी विश्वसनीय नहीं रहा.संस्कृत की एक उक्ति है राजा नहीं उसका प्रताप शासन करता है .जिस सरकार का प्रताप ख़त्म हो गया हो वही सरकाररात के डेढ़ बजे साधू -संतों ,निरीह साधकों और स्त्री बच्चों पर अपना प्रताप दिखलाती है .हम तो इस सरकार की दीर्घआयु की कामना कर सकतें हैं .पर लोग हैं कि मानते नहीं ।
    अब लोग यह कह रहें हैं कि वित्त मंत्रालय में चुइंगम का क्या काम .अगर इस सरकार के प्रवक्ता ने ये झूठ न बोला होताकि वह जासूसी यंत्रों का गम न होकर चुइंगम था तो सरकार को यह सब न सुनना पड़ता ।
    अब कई भारतीय यह भी पूछ रहें हैं कि क्या सरकार ही वित्त मंत्रालय को चुइंगम सप्लाइ करती थी .यह हो सकता हैकि एक आदि कर्मचारी च्युइंगम खाता हो .कहीं ऐसा तो नहीं सारे ही खातें हों और सरकार को पता न हो .कम से कमवित्त मंत्री पर तो यह शक नहीं जाना चाहिए .ये पुरानी भारतीय धारा के बंग भद्र जन हैं .वे च्युइंगम क्यों खायेंगें .भलेही हाई कमान से क्यों न आया हो .
    झूठ के पर नहीं होते .सरकार अगर मान ही लेती कि हाँ किसी ख़ास वजह से जासूसी करवाई गई तो सरकार को बे-सिर पैर के इलज़ाम तो न झेलने पड़ते .अब लोग यह पूछ रहें हैं कि प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के बाद दूसरे नंबर केवरिष्ठ मंत्री और सरकार चलाने के अनुभव में तो सबसे वरिष्ठ प्रणव मुखर्जी अपनी ऐसी विशिष्ट स्थिति में भी सरकारका हिस्सा नहीं हैं तो फिर अलग से सरकार क्या होती है ।
    क्या सिर्फ प्रधान मंत्री को ही सरकार कहा जाता है ?या कोई और असंवैधानिक सरकार होती है क्या ?हम तो सरकार केहिमायती हैं .कमसे कम सरकार उस शख्स को ढूंढकर पुरूस्कार तो दे ही सकती है जिसने पूरे कौशल से कहीं कुर्सी केपीछे ,कहीं मेज़ के नीचे ,कहीं दाएं ,बाएँ ,या ऊपर नीचे च्युइंगम चिपकाई थी ,जहां से आवाज़ को पकड़ा जा सके ।
    कहीं ऐसा तो नहीं है ,भारत सरकार ने ऐसी कोई च्युइंगम मंगाई हो ,कहीं से आयात की हो जो खाने के काम भी आतीहो और बा -वक्त जासूसी उपकरणों के चिपकाए जाने में भी इस्तेमाल होती हो .सरकार समर्थ है .और बाबा तुलसीदासकह गए हैं :
    समरथ को नहीं दोष गुसाईं ।

    अब सरकार के पास वक्त भी है ,भले ही आम भारतीय को रोज़ी रोटी के चक्कर में वक्त नसीब न होता हो .मैं भी आमभारतीय हूँ .सरकार चाहें तो किसी भोपाली जादूगर को बुलाकर ये पता करवा सकती है ,कि यह च्युइंगम कहाँ से आई?भारत के लोग शान्ति प्रिय हैं .फिलाल तो वह यही कह रहें हैं :
    जय च्युइंगम सरकार की

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  8. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

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  9. कांग्रेसियों से कुछ मत पूछो भाई. बाबा और उनके ट्रस्ट की संपत्ति के बारे में कांग्रेसी पूछ सकते है किन्तु उनसे राजीव गाँधी फाउन्डेशन ट्रस्ट के बारे में कोई नहीं पूछ सकता. सोनिया कितने ट्रस्टो की अध्यछ है ये कोई नहीं पूछ सकता. प्रणव मुर्खजी की जासूसी क्यूँ हुयी ये कोई नहीं पूछ सकता. सीढ़ी बात है पूछने का कॉपी राईट तो केवल कांग्रेसियों के पास है.

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  10. रनिवासों में होते षडयंत्रों के बारे में पढते थे, यह आधुनिक च्युइंग-यंत्र है।

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  11. yeh sab janta ka dhya batne ke liya hai.......


    jai baba banaras.........

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  12. prnva war room se tuda blog lekh purvacrah purn tatha kapolkalpit . bn.singh

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  13. HI,
    Please fill the form and press 'SUBMIT' below.

    ###This form is an effort to collect contact details of all nationalist bloggers and active people on Internet.
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    http://www.sanghparivar.org/nationalist-bloggers-register-here

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  14. कौन जवाब देगा इन बातों के?



    जांच होगी, कानून अपना काम करेगा, दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा, वगैरह वगैरह....

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