रविवार, 1 मई 2011

धर्मनिरपेक्षता, और सेकुलर श्वान : आयतित विचारधारा का भारतीय परिवेश में एक विश्लेषण:

धर्मनिरपेक्षता, और सेकुलर शब्द अक्सर सुनने में आता है हमारी रोजमर्रा की जीवनचर्या में..आइये प्रयास करते हैं इसका उदगम और भारतीय परिवेश में प्रासंगिकता.
इतिहास और उदगम: धर्मनिरपेक्षता शब्द का जनक जॉर्ज जेकब हॉलीयाक को माना जाता है,जो की मूलतः एक व्याख्याता और संपादक था..


ये राबर्ट ओवेन की विचारधारा से प्रभावित था जो समाजवाद के संस्थापक सदस्यों में से एक थे..राबर्ट ओवेन के विचार से
" सभी धर्म एक ही हास्यस्पद परिकल्पना पर आधारित हैं.जो मनुष्य को एक कमजोर मूर्ख पशु,उग्रता से पूर्ण धर्मांध व्यक्ति,एक कट्टरवादी या घाघ पाखंडी बनाती  है"

अब सेकुलर शब्द को गढ़ने वाले व्यक्ति के गुरु की विचारधारा ये थी तो शिष्य के सिधांत की स्वतः ही परिकल्पना की जा सकती है..आइये एक तथ्य और जान ले सेकुलर शब्द गढ़ने वाले हॉलीयाक के गुरु के बारे में अपने इस धर्म विरोध सिधांत के कुछ वर्षों बाद ओवेन ने आध्यात्म की राह पकड़ ली..


मुझे नहीं लगता की आध्यात्म किसी धर्म का विरोध सिखाता है क्यूकी यदि आध्यात्म बुढ़ापे का दर्शन है तो धर्म जवानी का ज्ञान..

जेकब हॉलीयाक ने १८४२ में ईशनिंदा के लिए ६ महीने हवालात में गुजारे..हवालात से बाहर आ के, इसने द मूवमेंट और द रिजनर नामक पत्र निकालना शुरू किया और इन पत्रों के मूल में था इसी धर्म विरोध... हेलियक ने इस पत्र के माध्यम से एक नई व्योस्था का आह्वान किया जो विज्ञान और तर्कों पर आधारित हो..इस व्यवस्था का नामकरण उसने "सेकुलरिज्म"किया जिसका भारतीय समानार्थी रूप हम "धर्मनिरपेक्षता" प्रयोग करते हैं..शाब्दिक रूप में इसकी कुछ परिभाषाएं हैं..

१ वो जीवन पद्धति जिनका आधार आध्यात्मिक अथवा धार्मिक न हो..
२ धार्मिक व्योस्था से मुक्त जीवन शैली..
३ वो राजनैतिक व्यवस्था जिसमें सभी धर्मो के लोग सामान अधिकार के पात्र हो.प्रसाशन एवं न्याय व्यवस्था निर्माण में धार्मिक रीती रिवाजों का हस्तक्षेप न हो..
४ ऐसी व्योस्था जो किसी धर्म विशेष पर आधारित न हो और शासनिक नीतियों का नियमन किसी धर्म विशेष को ध्यान में रख कर न किया जाए..

परिभाषा से और इतिहास से स्पष्ट है की इस शब्द का जन्म ही धर्म विरोध के स्थानीय और समसामयिक कारणों के फलस्वरूप हुआ..इसे हम एक जीवन पद्धति और समाज पद्धति के रूप में कैसे स्वीकार लें???

भारतीय परिवेश में एक विश्लेषण:इस शब्द की उत्पत्ति ईसाई धर्म के खिलाफ हुई थी ..ये मेरे समझ के बाहर है की ये हिन्दू बहुल हुन्दुस्थान में कैसे और क्यों लागू किया गया..और शायद इस परिकल्पना को मूर्त रूप देते समय क्या हमारे संविधान निर्माताओं ने ये नहीं सोचा की, भारत ऐसा देश है जहा हर १० किलोमीटर पर पानी का स्वाद और ५० किलोमीटर में पूजा पद्धति बदल जाती है.जिन्होंने सदियों से धार्मिक व्योस्थाओं पर आधारित समाज और कानून का पालन किया है वो अचानक सेकुलर कैसे हो जाएँगे..और अपने ही संविधान के दूसरे भागों में मुह की खायी हमारे नीति निर्माताओं ने..
सेकुलरिज्म का मतलब है की "ऐसी व्योस्था जो किसी धर्म विशेष पर आधारित न हो और शासनिक नीतियों का नियमन किसी धर्म विशेष को ध्यान में रख कर न किया जाए."जी नहीं हमारा संविधान एक तरफ भारत को सेकुलर कहता है और दूसरी ओर हिन्दू विवाह अधिनियम लागू करता है..एक तरफ सेकुलर कानून है जिसमें मुश्लिम की शादी मुस्लिम धार्मिक कानूनों और तलाक ३ बार तलाक तलाक तलाक बोलने से होता है.. जिस सेकुलरिज्म का मूल धर्म विरोध था, वह अब धर्म के घालमेल से क्या साबित करना चाहता है..विरोधाभास बार बार यही दर्शाता हैं की सेकुलर जैसी कोई विचारधारा हमारे समाज में अवस्थित नहीं हो सकती, हाँ विशेषकर राजनितिक लोगों के धर्म की सेकुलर खेती में खाद पानी का काम करती है..
भारतीय परिवेश के लिए अक्सर कई अलग अलग विद्वान अलग अलग राय देते हैं इस मुद्दे पर कोई कहता है की इसका मतलब धर्मविरोध नहीं है, इसका अर्थ है "सभी धर्मों की समानता"..तो ये तो हमारे मूल अधिकारों में भी है, समानता का अधिकार क्या जरुरत है सेकुलर तड़का लगाने की,और हम उस सेकुलरिज्म को सर्व धर्म सम्भाव के लिए सीढ़ी मानतें है जिसकी उत्पत्ति ही धर्म विरोध के धरातल पर हुई थी..
तो क्या हमारी सदियों पुरानी हिंदुत्व की अवधारणा इस आयतित विचारधारा के सामने नहीं ठहरती,जिसके मूल में सर्व धर्म सम्भाव और सहिष्णुता है???हिंदुत्व ने आज तक सभी धर्मों को स्वीकार किया और स्थान दिया सम्मान दिया..
सेकुलरिज्म नामक बिदेशी बालक ने अभी जन्म लिया किलकारियां भरने की उम्र गयी नहीं की गुलाम मानसिकता और सत्ता और कानून के मठाधिशों ने इसका राज्याभिषेक कर इसे युगों युगों पुरानी संस्कृति और विचारधारा के सामने खड़ा कर दिया...
वस्तुतः अभी सेकुलरिज्म की परिभाषा ही विवादित है हर व्यक्ति हर संस्थान अपने तरह से विश्लेषण करता है..जैसे किसी चारित्रिक पतन के गर्त में जा चुकी स्त्री के बच्चे के पिता के नाम के विश्लेषण में हम सबकी अपनी अपनी राय होगी..हमारे भारतीय राजनैतिक परिवेश में इस विवादित बच्चे को गोद ले कर सबने अपनी अपनी रोटियां सकने का प्रबंध कर लिया..
भारत के परिवेश में गर्त की पराकाष्ठा ये है की सेकुलर होने के लिए आप को धर्म विरोधी नहीं होना है अगर आप हिन्दू विरोधी हैं तो आप सेकुलर है अगर आप मुश्लिम धर्म के समर्थक हैं तो आप सेकुलर हैं..राजनैतिक विचारधारों की बात करे तो एक धड़ा है जो हिन्दू समर्थन के नाम का झंडा लिया है और वो साम्प्रदायिक है...चलिए मान लिया की वो धड़ा साम्प्रदायिक है ..तो वो लोग जो मुश्लिम धर्म का समर्थन कर रहें है वो कैसे साम्प्रदायिक नहीं है...
क्या हज में सब्सिडी देना साम्प्रदायिकता के दायरे में आता है??क्यूंकि ये तो सेकुलरिज्म के मूल सिधांत का उलंघन हुआ जो कहता है की "प्रसाशन एवं न्याय व्यवस्था निर्माण में धार्मिक रीती रिवाजों का हस्तक्षेप न हो.."
लेकिन छुद्र राजनैतिक स्वार्थ के वशीभूत हो कर इसे सेकुलरिज्म कहते हैं हमारे व्योस्था चलाने वाले और हिन्दू समारोह में शिरकत करना भी साम्प्रदायिकता का द्योतक लगता है इन सेकुलर श्वानो को..
सेकुलर श्वान शब्द मेरे मन में एक प्राणी को देख कर आया जिसका मुख एकलव्य ने अपने वाणों से इस प्रकार बंद कर दिया था की वो अपनी प्राकृतिक आवाज निकलने में असमर्थ हो गया.. अब एकलव्य तो आज के युग में पैदा नहीं होते और इन श्वानो का मुख हर समय तुष्टिकरण और हिंदुविरोध की नैसर्गिक आवाज भो भो भो भो निकालता रहता है सत्ता,पैसे और प्रचार की हड्डियों के लिए..सेकुलर श्वान सबसे ज्यादा हिन्दू धर्म में पैदा हो गएँ हैं और इस का कारण हमारी गुलाम मानसिकता अपने आप को हीन समझने का जो प्रबंधन मैकाले ने किया था उस हीन भावना के बबूल रूपी वृक्ष को आज तक खाद पानी दे रहें हैं ये सेकुलर श्वान.
हम अपनी गुलाम मानसिकता की अभिव्यक्ति के लिए सेकुलर बनने में किस कदर खोये हैं..
 एक उदहारण अमेरिका का देना चाहूँगा "in the god we trust " का जी हाँ ये शब्द मिलेगा आप को अमेरिका के डालर पर लिखा हुआ जिस देश की जी हुजूरी हमारे व्योस्था के महानुभाव भी करते हैं..अमेरिका के सिक्के और डालर पर लिखा ये शब्द उनके धार्मिक ग्रन्थ बाइबिल से लिया गया है..इस शब्द का विरोध भी हुआ अमेरिका में मगर वहां के सरकार ने इन लोगों के सामने न झुकते हुए अपनी संस्कृति से समझौता नहीं किया.. और आप इसे पढ़ सकते हैं डालर पर "in the god we trust:" के रूप में लिखा हुआ..
मगर क्या ये संभव है की भारत के सिक्के पर या नोट पर जय श्री राम लिखा जा सके???.यहाँ तो दूरदर्शन के चिह्न सत्यम शिवम् सुन्दरम में शिव का नाम आने के कारण तुस्टीकरण करते हुए बदल दिया गया..ऐसे कई उदहारण मिल जाएँगे..यहाँ वही गुलाम मानसिकता इस्तेमाल हुई जो मैकाले ने दी थी की अपने संस्कार और धर्म को गौण मानो और विरोध करो:.
अभी भारतीय परिवेश में ये सेकुलरिज्म का सिधांत अपरिपक्व सा महसूस होता है और जिसका इस्तेमाल हर तीसरा ब्यक्ति अपनी उल जलूल मानसिकता हो सही ठहराने के लिए करता है..सेकुलरिज्म उस तर्क और विज्ञान को आधार मानता है जो बार बार अपनी ही परिकल्पना को संशोधित करता रहता है..और फिर कुछ दिनों बाद उसे उन्नयन के नाम पर पलट देता है..वस्तुतः ये विज्ञान और धर्म की पूर्णकालिक द्वन्द है जिसे सेकुलरिज्म का नाम दे कर अपनी राजनैतिक विचारधारा को सही ठहराने की सीढ़ी बना साम्प्रदायिकता और सांप्रदायिक समाज की परिकल्पना की जाती है..


मेरे समझ से सेकुलर श्वानो को हिंदुत्व और गीता का अध्ययन करना चाहिए वो उन्हें एक सही,प्रमाणिक .सांस्कृतिक समाज एवं जीवन व्योस्था देने में समर्थ है जो उनके तर्क और विज्ञान के दृष्टिकोण से हर जगह विशुद्ध और प्रमाणिक है ..क्यूकी हिंदुत्व की अवधारणा सनातन है और इसका इतिहास ने राम और कृष्ण पैदा किये हैं न की मैकाले और डलहौजी..








आइये गर्व से कहें की हम हिन्दुस्थान में रहतें है और हम सेकुलर  नहीं है क्यूकी हमने विश्व को समाजशास्त्र से लेकर आध्यात्म की शिक्षा दी है ...हम सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से सदियों से आत्मनिर्भर और हमें नहीं जरुरत है ऐसी  सड़ी हुई आयतित अंग्रेजी विचारधारा की 
जिसमें हमारे मूल आदर्शों  की तिलांजलि देने रणनीति है.

जय हिंद जय हिन्दुस्थान 


24 टिप्‍पणियां:

  1. आपने सत्य कहा
    भारतीय संस्कृति ,भारतीय विज्ञानं,अर्थशाश्त्र,कला ,संगीत सब अद्वितीय है और मन को शीतलता देकर अज्ञान से ज्ञान की और ले जाने वाला है

    जय जवान ..जय किसान..जय विज्ञान..जय हिन्दुस्तान

    ये पावन भूमि है
    और इसकी मान बनी रहेगी सीमा पर,विधालयों में ,घर परिवार में और कार्य क्षेत्र में...
    सभी युवाओं को देश हित में अपना यथा उचित सहयोग देना चाहिए..कलम से,विचारों से,और अपने देश के स्वाभिमान की रक्षा के लिए सभी को एकजूट होकर आवाज़ उठानी होगी...


    जय हिंद की सेना

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  2. सेकुलरिज्म का मतलब प्रो (तथाकथित) अल्पसंख्यक होना बना दिया राजनीति के घाघ खिलाड़ियों ने..

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  3. सार्थक पोस्ट , ज्ञानवर्धक आपका आभार

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  4. अब क्या कहें आशुतोषजी .....सब कुछ इन गदारो ने बिगाड दिया |............आपने सही व् सार्थक पोस्ट लिखी है आपको पुन : शुक्रिया |............भारत एक आध्यात्मिक देश था ......ओर आने वाले समय में पुन : बनेगा |

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  5. आपने सही इतिहास प्रस्तुत किया, और सेक्यूलरिज्म को उसका विकृत परवरिश का स्थान बता दिया।

    सीधी सी बात है, सेक्यूलरिज्म, 'मनमौज से बस मजे लेने के स्वछंद मनोविकार की उपज है।'

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  6. अति गहन विश्लेषण से युक्त ज्ञानवर्धक व शोधपरक शानदार प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.कम से कम एक बार फिर से पढ़ना होगा मुझे.

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  7. भारतीय व्यवस्था---सर्वधर्म समभाव और सहिष्णुता --यही वास्तविक सेक्यूलरिज़्म है- सब धर्मों को समान रूप से साथ लेकर चलना... न कि धर्म विरोधी...
    --- और यह निष्कर्श ही सही है---

    "मेरे समझ से सेकुलर श्वानो को हिंदुत्व और गीता का अध्ययन करना चाहिए वो उन्हें एक सही,प्रमाणिक .सांस्कृतिक समाज एवं जीवन व्योस्था देने में समर्थ है जो उनके तर्क और विज्ञान के दृष्टिकोण से हर जगह विशुद्ध और प्रमाणिक है ..”

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  8. अत्यन्त गूढ विश्लेषण सेक्यूलरवाद व धर्मनिरपेक्षता का । वाकई एक बार का पढना काफी नहीं लगा ।

    टोपी पहनाने की कला...

    गर भला किसी का कर ना सको तो...

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  9. आइये गर्व से कहें की हम हिन्दुस्थान में रहतें है और हम सेकुलर नहीं है

    jai baba banaras........

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  10. अगर आप हिन्दू विरोधी हैं तो आप सेकुलर है अगर आप मुश्लिम धर्म के समर्थक हैं तो आप सेकुलर हैं.

    jai baba banaras................

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  11. इसाई धर्म मे पूर्व मे अपराधो को क्षमा करने की दर सूची थी । हत्या के अपराध की क्षमा दर १६०० केआस पास ३५ स्वर्ण मुद्रायें थी । चर्च से लंबी दूरी पर रहने वाले डकैत अग्रिम क्षमा भी खरीद लिया करते थे

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  12. नई जानकारी देता एक विचारोत्तेजक आलेख। पढना अच्छा लगा।

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  13. सार्थक और ज्ञानवर्धक पोस्ट |

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  14. सार्थक , विचारणीय आलेख

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  15. is ek shabd ne hindustaan kaa jitnaa narth kiyaa hai vah akoot hai .pahle kuchh rakt rangi (leftiye ),sekyular putr sarkaar me rahte hue bhi kamitment se door rahe ,door se hi tekaa lgaa -yaa sarkaar ko jab marji tekaa hataa liyaa .
    kaisi dharm -nir pekshtaa kyaa shaahbaano kaa hak chheennaa dharm nirpekshtaa hai ,indiraji ne kis jhonk me samvidhaan me ye shbd naththi kiyaa raam jaane ,vot tantr me bdaa kaam aayaa hai yah ek sgbd "SECULAR ."
    veerubhai .

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  16. भारतीय व्यवस्था---सर्वधर्म समभाव और सहिष्णुता --यही वास्तविक सेक्यूलरिज़्म है- सब धर्मों को समान रूप से साथ लेकर चलना... न कि धर्म विरोधी...
    सार्थक पोस्ट , ज्ञानवर्धक आपका आभार

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  17. wow nice post love it you share good information for us

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  18. भारत के परिवेश में गर्त की पराकाष्ठा ये है की सेकुलर होने के लिए आप को धर्म विरोधी नहीं होना है अगर आप हिन्दू विरोधी हैं तो आप सेकुलर है अगर आप मुश्लिम धर्म के समर्थक हैं तो आप सेकुलर हैं


    sudo intelligence and comitted mentality reopened here

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  19. सटीक ... गहन विश्लेषण ......नमन हमारी सामाजिक आध्यात्मिक संस्कृति को........

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  20. आशुतोष जी,
    कांग्रेस या कहू तो दिग्विजय सिंह जैसे नेता दो चार और हो जा तो फ़िर से औरंगजेब का शासन आ जायेगा, वो तो शुक्र है कि ऐसे नेता अब किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री ना है रे राम-राम उठा ले ऐसे नेताओं को।

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  21. अगर आप हिन्दू विरोधी हैं तो आप सेकुलर है अगर आप मुश्लिम धर्म के समर्थक हैं तो आप सेकुलर हैं.
    मैं नहीं बी जे पी को छोडकर सभी ये ही कह्ते है।

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  22. मित्र! रॉबर्ट ओवेन ने सिर्फ़ सेकुलर शब्द गढ़ा है, धर्म निरपेक्ष नहीं. धर्म शब्द से उसका परिचय ही नहीं था, वह जिसे जानते थे वह था रेलिजन. दोनों के अर्थ और मूल प्रकृति में भे बहुत फ़र्क़ है. असल में रेलिजन सिर्फ़ वही है जिसे आप कर्मकांड कहते हैं. इसने धर्म को भी बहुत पीछे धकेल दिया है और वाकई तमाम तरह की मूर्खताओं में फंसा दिया है. बाहरी आडंबरों ने सही पूछिए तो सनातन धर्म की भी आत्मा की हत्या कर दी है.
    जहां तक कांग्रेसी या सरकारी सेकुलरिज़म की बात है तो उसका अर्थ आप ईमान निरपेक्षता से लें. सच तो यह है भारत में मुसलमानों का सबसे ज़्यादा अहित कांग्रेस ने किया है. भला उसने सिर्फ़ नेहरू परिवार और उसके चमचों का किया है.

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  23. जी नहीं हमारा संविधान एक तरफ भारत को सेकुलर कहता है और दूसरी ओर हिन्दू विवाह अधिनियम लागू करता है..एक तरफ सेकुलर कानून है जिसमें मुश्लिम की शादी मुस्लिम धार्मिक कानूनों और तलाक ३ बार तलाक तलाक तलाक बोलने से होता है.. जिस सेकुलरिज्म का मूल धर्म विरोध था, वह अब धर्म के घालमेल से क्या साबित करना चाहता है..विरोधाभास बार बार यही दर्शाता हैं की सेकुलर जैसी कोई विचारधारा हमारे समाज में अवस्थित नहीं हो सकती,

    सार्थक चिंतन,मूलभूत प्रश्नों को उठाता हुआ.
    आपकी विषद विश्लेषण प्रस्तुत करती हुई पोस्ट के लिए आभार.
    आप मेरे ब्लॉग पर नहीं आये अभी तक.कोई नाराजगी तो नहीं.

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