रविवार, 13 मार्च 2011

क्यूकी...रोड़ी जो बनना है..................

रघु.राजीव और रणविजय सुना है आप ने ये नाम शायद चैनल बदलते वक़्त दो टकलों के बीच में एक बालों वाला इन्सान मिल जाए..वही हैं ये तीन नालायक ...सोच रहा था इतने छिछोरे लोगों के बारें में लिख कर समय बर्बाद करूँ या नहीं..फिर देखा आज कल के युवाओं को गिडगिडाते हुए उनके शो में जाने के लिए..तो सोचा एक छोटा सा प्रयास करूँ...
जो इन महानुभावों को नहीं जानते है उनके लिए बता दूँ की इनके नाम पर न जाएँ..ये बिलकुल भी रघु या रणविजय या राजीव जैसा व्यक्तित्व नहीं रखतें है..ये एक रिअलिटी शो का आठवा संसकरण बना रहें है MTV रोडीज...
रोड़ी बनने की जो पात्रताए है उसमें से कुछ इन टकलों के अनुसार निम्नांकित है...

१ रोड़ी बनने के लिए माँ बहन की गालिया सुनना जरुरी है...जैसा की वो हर दुसरे मिनट में प्रतियोगी की माँ और बहन के लिए निकलते है...और बीप बीप करके हमे उन गलियों का एहसास कराया जाता है..

२ आप को समलैंगिकता(गे) को मान्यता देनी होगी.. ऐसा ये टकले सुनते कहे गए कई बार की समलैंगिकता सही है..और प्रतियोगी के विरोध करने पर उन्हें गालिया मिलती है...

३ आप को भारतीय संस्कृति के बारे में कुछ भी बोलने का अधिकार नहीं है क्यूकी अगर आप ने भारत या भारत की संस्कृति की बात की तो आप संस्कृति के ठेकेदार कहकर बाहर निकल दिए जाएँगे..

ज्यादा लम्बी लिस्ट नहीं लिखूंगा सिर्फ इन्ही पंक्तियों को आधार बनता हूँ ...
आज तक हमने अपनी इज्जत व देश की खातिर गोलियां खाना सिखा है..अब रोड़ी बनिए और अपनी माँ बहन की गलियां सुनिए...मतलब अब हमारे यहाँ बेहया नामर्द बनाए जाएँगे जिनकी माँ बहनों की इज्जत MTV के ये टकले स्टूडियों में नीलाम करेंगे और हमारे देश के कर्णधार सर झुकाकर अपनी माँ बहनों को इनके सामने रख देंगे..क्यूकी रोड़ी जो बनना है...
आगे भी वो कुछ बनेंगे... वो अब समलैंगिक बनेंगे क्यूकी समलैंगिकता को मान्यता तो रोड़ी के जज ही दे रहें है..रोड़ी स्कूल के बच्चे तो अनुसरण ही करेंगे.. और भारतीय संस्कृति को तो MTV के कूड़ेदान में ही डाल देंगे ..
वैसे भी भारतीय संस्कृति विवेकानंद रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह और समर्थ रामदास पैदा करती है..बेहया नामर्द माँ बहनों की इज्जत नीलम करने वाले रोड़ी नहीं...
दुःख ये है की हमारी नयी युवा पीढ़ी के कुछ लोग कतारबद्ध हो कर कातर दृष्टि से इनके सामने दुम हिलाते रहते है..


अब रोड़ी टाइप युवाओं से एक अपील: मेरे बंधुओ बेहयाई छोड़ो देश के लिए गोली खाने का माद्दा रक्खो.. इन टकलों से माँ बहन की गाली खाने का नहीं...विवेकानंद बनो,भगत सिंह बनो रामदास बनो..और अगर ये नहीं बन सकते तो इन्सान बनो समलिंगी बीमार नहीं....
ये बिदेशी मीडिया और उसके चमचे तो भारत को खोखला करने के लिए ये सब कर रहें है और तुम उनका साथ दे रहे हो क्यूकी...रोड़ी जो बनना है..................

आप सभी पाठकों से मैं कहना चाहूँगा इस लेख को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाने में मेरा सहयोग करें..ताकि शायद ये समाजद्रोही गद्दार जान जाएँ की ये देश मर्दों का है नामर्दों का नहीं...........

जय हिंद जय भारत...

आशुतोष

8 टिप्‍पणियां:

  1. very good....really they are pretending as if they are only modern nd person who talks about the culture or anything like that, they abuse them..and that rajiv..shows like he respects women a lot but abuse indirectly their sisters nd mother....this show should be banned...

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  2. maine blog bahut achche se padha to nahi lekin dekha kafi dhyan se
    very nice profile and blog good
    i wiil try to read it regularly

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  3. सही लिखा है आपने । लोग अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे तो सुधार अवश्य आएगा।

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  4. Very correctb friend ...they use such a rubbish language...in fact such programs should be banned...it gives a wrong message that these things are cooool...idiotic..

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  5. आशुतोष भाई
    गज़ब की बात कही है आपने| इन टकलों की राह पर देश चल पड़ा तो सभी रोड़ी (सड़क छाप) ही बनेंगे| पता नहीं इन युवाओं को सड़क छाप बनने में क्या गौरव मिलता है| अपनी माँ-बहन का अपमान करने में क्या मज़ा मिलता है|
    ये तकले इटरव्यू में एक लड़की को एक मिनट तक "गन्दी-गन्दी गालियाँ "बकने को कहते हैं| एक लड़का जब लिव-इन-रिलेशनशिप पर उंगलियाँ उठाता है तो उसकी मंगेतर को "कीप" कहते हैं|
    मेरा तो मानना है कि भारत के युवाओं को नाथूराम गोडसे बनना चाहिए|
    काश कोई भूषण और अग्निवेश की तरह इनकी भी पिटाई कर दे|
    आपकी यह पोस्ट में अधिक से अधिक शेयर करूँगा और अपील करूँगा कि इस भारत विरोशी सड़क छाप शो का बहिष्कार करें|

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  6. bhut achhi baat kahi hai aapne .........jai shri ram

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  7. we should boycott not only that programme but that channel fully. this is the only way to penalize them in today's economic scenrio/
    environment

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