मंगलवार, 29 मार्च 2011

मनमोहन जी विश्वकप में भारत की इज्जत लुटवाने की अग्रिम बधाइयाँ

कल मोहाली में क्रिकेट मैच है हिन्दुस्थान और पाकिस्तान का..सुना है भारत के प्रधानमंत्री भी आ रहें है..कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री जी ने अन्ना हजारे को समय देने से इंकार किया था व्यस्तता का हवाला देते हुए.. हाँ भाई अन्ना हजारे उनके मंत्रियों के लूट का हिसाब मांगने वाले थे एक हिंदुस्थानी की हैसियत से..
अब मोहाली के लिए माननीय प्रधान मत्री जी को समय मिल जाता है...अगर भारत जीते या भारत हारे दोनों ही परिस्थितियों में न तो काला धन वापस आ सकता है,न ही महंगाई घट सकती है, न ही ये चोर सरकार अपनी चोरी और लूट को बंद कर सकती है...एक सामान्य नागरिक की हैसियत से मैं जो सोचता हूँ या पाता हूँ हम लोग भावना के आवेश में बह जातें है...अभी भावना क्रिकेट की है..कल महंगाई..परसों काला धन तो कभी भोपाल..

भोपाल से याद आया हम लोग ने कितनी चिल्ल पों मचाई थी कुछ माह पहले भोपाल गैस कांड को ले कर...मीडिया ने भी मिले सुर मेरा तुम्हारा करते हुए बेचना शुरू कर दिया था भोपाल त्रादसी के जख्मों को..
.
क्या बदल गया भोपाल में तब से आज तक...कुछ नहीं...लेकिन हमने तो मोंबत्तियां जला ली ..ब्लॉग लिख लिया और बस हो गया भोपाल कांड ख़तम....
मुद्दे को उठाने से जरुरी उसको तब तक जीवंत रखना होता है जब तक वो अपनी परिणिति तक न पहुच पाए ...और कई लोग बोलेंगे की आज भोपाल मुद्दे का क्या ओचित्य है.. तो मित्रों आज न तो बरसी है भोपाल कांड की,न ही किसी विकिलीक्स ने खुलासा किया है..ये मुद्दे को जीवंत रखने का एक सामान्य आदमी का एक छोटा सा प्रयास है...

आगे देखें तो हमारे प्रधानमंत्री जी ने नापाक पाक के सभी आतंकवादियों को सरकारी मेहमान बनने का न्योता भी भेज दिया..
अरे कसब और अफजल जैसे दामाद पा के आप का जीवन धन्य नहीं हुआ की आज ये दोगलापन दिखा रहे हो...ये दोगला शब्द का चयन मैंने पुरे होशोहवास में किया है...क्यूकी इस निर्णय से कहीं न कही एक आम हिन्दुस्तानी भी आहत है..मुंबई हमलों के बाद इसी सरकार ने गले फाड़ फाड़ के कहा था की अपराधियों पर बिना किसी करवाई के कोई वार्ता नहीं होगी...शर्म अल शेख में क्या कसब की हालचाल देने गए थे आप..और गए भी तो बलूचिस्तान बलूचिस्तान का मन्त्र पढ़कर भारत को ही कटघरे में खड़ा कर दिया...आप भारत के प्रतिनिधि थे या पाकिस्तान के बिचौलिए.
.

ये तो फिर भी उच्च स्तर की बातें है जिसकी समझ मुझे न हों मुझे ये बताएं आज तक पाकिस्तान ने खुल्ला घूम रहें मुल्ला और अपराधियों के आवाज के नमूने भी नहीं दिये पकड़ना तो दूर और हम दुम हिला रहें है कायरों की तरह और मैच दिखा रहें है..अतिथि सत्कार कर रहें है....कोई आश्चर्य नहीं होगा इस भरत मिलाप के कुछ माह में ही भारत में बम फोड़े जाएँ या कश्मीर में कत्ले आम हो.. तो हम हर बार अपनी ही बातों से फिर जातें है ..एक पाकिस्तानी पत्रकार को कहते सुना था मैंने की पाकिस्तान को वार्ता के लिए झुकने की जरुरत नहीं है,भारत वाले १-२ साल बाद खुद ही आयेंगे हमारे पास ..
.तो सोनिया के मनमोहन जी आप के आप के सरकार की,युवराज और महरानी की पाकभक्ति के कायल पाकिस्तानी भी है..वो जानते है की आप के लिए कसब और पाकिस्तानी जल्लाद प्यारें है तो आप मैच देखने आयेंगे ही गिलानी से चोंच लड़ायेंगे ही...हा गलती से कश्मीरी पंडितों का हाल नहीं लेंगे क्यूकी बड़े दामाद अफजल जी नाराज हो जाएँगे..
चलिए आप को विश्वकप में भारत की इज्जत लुटवाने की अग्रिम बधाइयाँ...

जय हिंद

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

भारत का पहला मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पोर्न(अश्लील) चैनल आज तक..


प्रिय मित्रों..
शायद ऊपर की तस्वीर ज्यादातर लोगों को अमर्यादित लगे...मगर क्या आप जानते है ये तस्वीर मैंने कहाँ से ली है...
ये तस्वीर है आज तक की वेबसाइट से ली है मैंने..और विश्वास माने ये उस एल्बम में दिखाई गयी ३९ तस्वीरों में में से एक है ...पूर्ण रूप से नग्न तस्वीरों का एल्बम ही बना रखा है आज तक वालों ने.....लिंक मैं दे देता हूँ आप खुद विश्वास कर लें..
http://origin-aajtak.intoday.in/photoplay.php/photo/view/815/५
एक दिन अचानक समाचार पढ़ते पढ़ते इन गद्दार खबरिया चैनलों के मनोरंजन विभाग में ये तस्वीर दिखी ...चलिए अब तक तो ये राजनैतिक रूप से दलाली कर रहें थे अब सांस्कृतिक रूप से भी गिर रहें है..
ये गद्दार सबसे सवाल कर सकते है.इन गद्दारों से कौन सवाल करेगा...अगर कोई कुछ बोले तो प्रेस की स्वतंत्रता का हनन कहा जाता है..कहाँ है इन बिदेशी हाथों में बिके हुए चैनलों का सेल्फ रेगुलेशन??
ये कहतें है की हम खबर दिखा रहें है..भाई आप मुझे बताये ये नंगी तस्वीर दिखाने से कौन सी खबर दिखा रहे हो...तर्क देते है की ये समाज में हो रहा है वो हम दिखा रहें है...अरे करते तो तुम सभी सेक्स भी हो अपने घर में,अच्छा होगा एक सीडी बना कर अपने माँ बहन बेटियों की कामक्रीड़ा का आजतक पर विशेष कार्यक्रम चला दो...
ये दलाल कहते हैं की मीडिया हमारी(आम जनता) की आवाज है..मैंने पुरे मर्यादित रूप से एक टिप्पड़ी की थी इन तस्वीरों पर वो इन बिदेशी औलादों ने ब्लोक कर दिया किसी ने लिखा था I LOVE उसे दिखा दिया...ये तो सिर्फ उपभोगतावाद के हिमायती हैं.. जहा से इनकी दुकान चलती हो ..
शायद हम सबमें से भी कोई इन दलालों का हिमायती हो तो प्रश्न किसी ने ये उठाया की आप देखते क्यों है ये तस्वीरें ...चलिए माना मैं भटक कर देखता हूँ..मेरे अन्दर कामिया है..लेकिन प्रेस तो लोकतंत्र का स्तम्भ है ...और लोकतंत्र तो दोगला और चारित्रिक पतन की और ले जाने वाला नहीं होता है..तो हम लोकतंत्र और उसके पहरेदारों से तो न्याय और सदाचार की उम्मीद कर सकतें है...
एक पत्रकारिता का दलाल कहता है की अच्छी बातें भी तो है आप को बुरी क्यों दिखती है..मेरा सवाल ऐसे सभी पत्रकारों से मोदी ने विकास भी तो किया तुम मक्कारों को गोधरा ही क्यों दीखता है...
मैं यहाँ कोई विवाद शुरू करने नहीं आया हूँ ढेर सारी पोर्न वेबसाइट है जहा सब कुछ मिल जाता है मगर एक राष्ट्रीय(भले ही आज इटली की आवाज हो) समाचार चैनल अपने छुद्र व्यापारिक हितो के लिए इस स्तर गिर जाएगा इसकी परिकल्पना तो लोकतंत्र में नहीं की गयी थी..
कोई आश्चर्य नहीं होगा हम कुछ दिनों बाद आज तक और उसके जैसे बिदेशी हाथों में बिके हुए चैनलों पर ब्लू फिल्म का दिन में २-३ घंटे का विशेष कार्यक्रम पायें...
तो चलिए आज तक के नाम एक और पुरस्कार घर घर में पहुचने वाला सबसे तेज पोर्न चैनल...
या भारत का पहला मान्यता प्राप्त पोर्न(अश्लील) चैनल..

आशुतोष

बुधवार, 16 मार्च 2011

मीडिया के दलालों से एक हिंदुस्थानी के कुछ सवाल ......

मित्रों,
भारत के संविधान निर्माण के समय मीडिया को लोकतंत्र का एक स्तम्भ माना गया है... अभी कुछ दिनों पहले एक लोकतंत्रत पर कविता लिखी थी सोचा चलो लोकतंत्र के सबसे उर्जावान और जवान होते स्तम्भ पर कुछ लिखू..अब मैं कोई पत्रकार तो हूँ नहीं एक आम हिन्दुस्तानी हूँ जो की थोड़ी बहुत समसामयिक विषयों पर समझ रखता है..तो कुछ अख़बारों की कतरन इकठ्ठा की..इन्टरनेट पर गया और कुछ पत्रिकाओं में कुछ जाने मने लोगों के लेख पढ़े..आज के कुछ युवा पत्रकारों के ब्लॉग पर गया...कुछ वरिष्ठ लोगो की सम्पादकीय कृतिया पढ़ी..जहाँ तक मैं एक अदना सा हिन्दुस्तानी (जिसकी कीमत आज के लोकतंत्र में भेड़ बकरी से ज्यादा नहीं है) सोच पा रहा हूँ पत्रकारिता निष्पछ निर्भीक और पूर्वाग्रह के बिना होनी चाहिए..मगर आज कल के मुख्य खबरिया चैनल और अख़बार को देखें तो लगता है की जैसे दो मुख्य राजनितिक धाराओं की तरह दो पत्रकारिता की धाराएँ हो गयी है...
और ये पत्रकार कुछ कांग्रेस के भोपू का काम कर रहें है और कुछ भारतीय जनता पार्टी वाले गठबंधन के भोपूं का...उसमें भी एक गठबंधन(कांग्रेस) पैसे से ज्यादा सुदृढ़ दिखता है तो लगभग ८५% पत्रकार व चैनल उसके पिछलग्गू हो गएँ है. मैं यहाँ अपने किसी राजनैतिक विचारधारा को सही नहीं ठहरने आया हूँ..में केवल कुछ उदाहरण देना चाहता हूँ और आप सभी लोगो से और विशेषकर इस बिकी हुए मीडिया के बिके हुए दलाल पत्रकारों से मेरे ५ प्रश्न है शायद इन लोकतंत्र के गद्दारों या इनके किसी समर्थक के पास इसका कोई जबाब हो..

१ कुछ दिन पहले एक नाम का भोपूं बज रहा था हसन अ
ली..उसके ४ बड़े कांग्रेसी मंत्रियों से सम्बन्ध की बात सामने आई थी..
उसपर लगभग २ लाख २५ हजार करोड़ का जुर्माना है भारत सरकार का..पहला तो ये की क्या ये देशद्रोही पत्रकार हसन अली के बारे में नहीं जानते थे पहले..जो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भोपू बजाना शुरू किया,क्यूकी उसके बाद कोई रास्ता नहीं था कुछ तो दिखाना होगा नहीं तो इनकी T R P का क्या होगा...
अब जब उसे जमानत मिल गयी क्यूकी इस देश की गद्दार सरकार कोई सबूत नहीं पेश करना चाहती थी तो कहाँ है ये मीडिया..क्यों नहीं किसी पत्रकार ने आवाज उठाई ..क्यों नहीं किसी चैनल ने अपना भोपूं बजाया..क्यूकी शायद २ लाख २५ हजार करोड़ में से १००-२०० करोड़ की हड्डियाँ उनके मुह में भी हसन अली ने डाल दी होंगी.. ये भोंक सकते है बाबा रामदेव पर क्यूकी उनके पास इनके मुह में डालने के लिए हड्डियाँ नहीं है..जब तक रामदेव का योग बिका उसको बेचा अब रामदेव को गाली दे कर ही कमा लें.. कुछ नहीं तो सरकारी योजनाओ के प्रचार का ठेका तो मिल ही जाएगा..

२ बड़े प्रतिष्ठित नाम थे.. प्रभु चावला, वीर सिंघवी और बरखा दत्त(इन मोहतरमा कारगिल में off CAMERA चरित्र चित्रण कुछ लोग पहले जानतें रहें हो)..

मगर बाकि के दो लोग भी दलाल निकले..अब ये तो होगा नहीं की खबर नहीं होगी इनके चैनल को.. एक आम हिन्दुस्तानी कैसे मान ले की इस मीडिया के तालाब में बरखा दत्त ,प्रभु चावला जैसी सड़ी मछलियाँ और नहीं होंगे..कुछ माह पहले तक ये भी दूध के धुले थे.. ये किसी गांव के पत्रकार की कहानी नहीं है जिसपर कोई भी आरोप लगा देता है PAID न्यूज़ का...... ये मीडिया के आदर्श थे..हाँ ये तथाकथित पत्रकारिता के दलाल आदर्श कुछ ही सालों में करोडपति कैसे हो गए इसका जबाब शायद नीरा राडिया के टेप में मिल जाए..
कहाँ पत्रकारिता को धर्म मानने वाले आदर्श पत्रकार की परिकल्पना कहाँ ये व्यवसाय बना कर दलाली करने वाले और पाच सितारा संस्कृति के झंडेडार दलाल..

३ जहाँ तक मुझे याद आ रहा है माननीय सोनिया मायनो गाँधी जी १० साल से होंगी सक्रिय राजनीती में..UPA एवं कांग्रेस के सर्वोच्च पद पर हैं..मुझे बताएं इनकी कोई जिम्मेदारी निर्धारित है इस सरकार या कांग्रेस पार्टी या देश की तरफ..मैं नाम नहीं गिनवाऊंगा बच्चा बच्चा अब जानता है घोटालों की लिस्ट को ..
क्या कभी इन पत्रकारिता के नामर्दों नें पिछले १० साल में एक बार भी सोनिया मायनो गाँधी जी या पत्रकारों के युवराज राहुल गाँधी को किसी भी प्रकार किसी भी घोटाले या घटना के लिए जिम्मेदार माना है... ये तो तलवे चाटने में लगे रहते है..
और सुनिए, युवराज, महाराज, महारानी नए नए विशेषण दिए जातें है..अरे दलाल पत्रकारों ये युवराज,महाराज,महारानी तो राजशाही में होती थी लोकतंत्र में क्यों तलवे चाट चाट कर अपनी जीभ को बिदेशी स्वाद दे रहे हो..अगर यही करना है तो किसी कोठे की दलाली कर लो कम से कम पत्रकारिता को बदनाम मत करो..

गोधरा के बाद के दंगे और हिन्दू विरोध इन दलालों का सबसे अच्छा तरीका है नोटों की गड्डियों की हड्डिया बटोरने का: जब देखो तब गोधरा गोधरा गोधरा के दंगे.. जब चुनाव होंगे गोधरा टेप चालू ...मैं गोधरा के समर्थन या विरोध में कुछ नहीं बोल रहा हूँ ये न्यायलय तय करेगा मगर मुझे बताएं लाखों कश्मीरी हिन्दुओं को,जो अपने हे देश में बेघर भटक रहें है, इन गद्दारों ने कभी कवरेज दी है...इस बिकी हुए मीडिया के जयचंदी पत्रकारों ने कभी उनका हाल जानने को सोचा है... नहीं नहीं भाई हिन्दुस्थान में हिन्दू कई करोड़ है कश्मीर में जो वोट बैंक है इन दलालों के बाप का वो तो अफजल और कसब को दामाद बना के रखने से ही बचा हुआ है तो मरने दो कश्मीरी पंडितो को....हिन्दुस्थान का सामान्य हिन्दू तो कुत्ते की तरह मरने के लिए पैदा होता है..

५ अब अंतिम प्रश्न इन दलों नए कभी बताया है आप को स्वामी विवेकानंद के बारे में..राणा प्रताप और सुभाष के बारे में हमारे महर्षि कणाद का बारे में या कभी दी है कवरेज आर्यभट्ट को..इनके आदर्श है सलमान शाहरुख़ और आमिर..कुत्ते की तरह पीछे पीछे लगे रहते है की एक बार कुछ बोले(चाहें गाली ही क्यों न दें) और हम दिन भर उसका टेप चला चला कर चला चला कर TRP की दौड़ में प्रथम आयें .....और कुछ नहीं मिला तो सीधा प्रसारण देखने को मिलता है दो माडलों की लड़ाई का..इससे कौन सा लोकतंत्र का हित हो रहा है मुझे बताएं??

चलिए अब आज की मीडिया के ५ मुख्य समाचारों के साथ आप को छोड़ जाता हूँ..
१ सलमान खान का हुआ ब्रेक अप (अब सलमान क्या करेंगे...अब कटरीना कैसे जियेंगी....इत्यादी, इत्यादि)
२ शिला की जवानी को मुन्नी की बदनामी ने पछाड़ा (अब कैसे करेगी शिला इसका सामना.....)
३ राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी एक साथ सड़क पर टहलते हुए देखे गए( शायद युवराज के शादी की बात हो रही है)
४ राहुल बाबा ने चुनाव प्रचार के दौरान की जोगिंग (ताजी तस्वीरे सिर्फ हमारे चैनल पर)
५ क्या ऐश गर्भवती है,उनका पेट देखकर लगता है की है जी हाँ ये है आज की ब्रेकिंग न्यूज़..

और निचे घूम रही छोटी पट्टी में कुछ समाचार जो शायद कमजोर नजर वाले पढ़ भी न पायें ..

१ आज हिंदी दिवस मनाया गया..
२ कश्मीर में आतंकियों से लड़ते हुए ३ जवान और १ मेजर शहीद
३ संसद में महिला बिल पर चर्चा जारी
४ GDP में बढ़ोतरी की संभवाना
५ भारत ने पृथ्वी मिसाईल का सफल टेस्ट किया..
६ विदर्भ के किसान ने की आत्महत्या


जय हिंद जय भारत

रविवार, 13 मार्च 2011

क्यूकी...रोड़ी जो बनना है..................

रघु.राजीव और रणविजय सुना है आप ने ये नाम शायद चैनल बदलते वक़्त दो टकलों के बीच में एक बालों वाला इन्सान मिल जाए..वही हैं ये तीन नालायक ...सोच रहा था इतने छिछोरे लोगों के बारें में लिख कर समय बर्बाद करूँ या नहीं..फिर देखा आज कल के युवाओं को गिडगिडाते हुए उनके शो में जाने के लिए..तो सोचा एक छोटा सा प्रयास करूँ...
जो इन महानुभावों को नहीं जानते है उनके लिए बता दूँ की इनके नाम पर न जाएँ..ये बिलकुल भी रघु या रणविजय या राजीव जैसा व्यक्तित्व नहीं रखतें है..ये एक रिअलिटी शो का आठवा संसकरण बना रहें है MTV रोडीज...
रोड़ी बनने की जो पात्रताए है उसमें से कुछ इन टकलों के अनुसार निम्नांकित है...

१ रोड़ी बनने के लिए माँ बहन की गालिया सुनना जरुरी है...जैसा की वो हर दुसरे मिनट में प्रतियोगी की माँ और बहन के लिए निकलते है...और बीप बीप करके हमे उन गलियों का एहसास कराया जाता है..

२ आप को समलैंगिकता(गे) को मान्यता देनी होगी.. ऐसा ये टकले सुनते कहे गए कई बार की समलैंगिकता सही है..और प्रतियोगी के विरोध करने पर उन्हें गालिया मिलती है...

३ आप को भारतीय संस्कृति के बारे में कुछ भी बोलने का अधिकार नहीं है क्यूकी अगर आप ने भारत या भारत की संस्कृति की बात की तो आप संस्कृति के ठेकेदार कहकर बाहर निकल दिए जाएँगे..

ज्यादा लम्बी लिस्ट नहीं लिखूंगा सिर्फ इन्ही पंक्तियों को आधार बनता हूँ ...
आज तक हमने अपनी इज्जत व देश की खातिर गोलियां खाना सिखा है..अब रोड़ी बनिए और अपनी माँ बहन की गलियां सुनिए...मतलब अब हमारे यहाँ बेहया नामर्द बनाए जाएँगे जिनकी माँ बहनों की इज्जत MTV के ये टकले स्टूडियों में नीलाम करेंगे और हमारे देश के कर्णधार सर झुकाकर अपनी माँ बहनों को इनके सामने रख देंगे..क्यूकी रोड़ी जो बनना है...
आगे भी वो कुछ बनेंगे... वो अब समलैंगिक बनेंगे क्यूकी समलैंगिकता को मान्यता तो रोड़ी के जज ही दे रहें है..रोड़ी स्कूल के बच्चे तो अनुसरण ही करेंगे.. और भारतीय संस्कृति को तो MTV के कूड़ेदान में ही डाल देंगे ..
वैसे भी भारतीय संस्कृति विवेकानंद रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह और समर्थ रामदास पैदा करती है..बेहया नामर्द माँ बहनों की इज्जत नीलम करने वाले रोड़ी नहीं...
दुःख ये है की हमारी नयी युवा पीढ़ी के कुछ लोग कतारबद्ध हो कर कातर दृष्टि से इनके सामने दुम हिलाते रहते है..


अब रोड़ी टाइप युवाओं से एक अपील: मेरे बंधुओ बेहयाई छोड़ो देश के लिए गोली खाने का माद्दा रक्खो.. इन टकलों से माँ बहन की गाली खाने का नहीं...विवेकानंद बनो,भगत सिंह बनो रामदास बनो..और अगर ये नहीं बन सकते तो इन्सान बनो समलिंगी बीमार नहीं....
ये बिदेशी मीडिया और उसके चमचे तो भारत को खोखला करने के लिए ये सब कर रहें है और तुम उनका साथ दे रहे हो क्यूकी...रोड़ी जो बनना है..................

आप सभी पाठकों से मैं कहना चाहूँगा इस लेख को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाने में मेरा सहयोग करें..ताकि शायद ये समाजद्रोही गद्दार जान जाएँ की ये देश मर्दों का है नामर्दों का नहीं...........

जय हिंद जय भारत...

आशुतोष

शनिवार, 12 मार्च 2011

देश के हिजड़ों मुझे माफ़ करो मैंने तुम्हारी तुलना कांग्रेस सरकार से कर दी

हसन अली को कल जमानत मिल गयी; मिलती क्यों नहीं हुक्म इटली से आया था सरकारी अधिकारी कैसे सबूत पेश कर सकते थे. एक बात यहाँ दीगर है की हसन अली के बारे में सुचना तो २००७ से ही थी २०११ तक क्यों बचा रहा वो.. दिग्विजय सिंह जैसे चाटुकार को तो इसमें भी बाबा रामदेव या भगवा आतंकवाद का हाथ लगेगा..अरे भैया २००४ के बाद से राज तो आप का ही है...मतलब हसन अली को आप ने ही बचाया है..या इटली के कुछ दलालों ने ...विडंबना ये है की हसन अली को जमानत मिल गयी और हमारी बिकी हुए मीडिया ने एक छोटी सा खबर बनाया इसे.... इस देश के २लाख २५ हजार करोड़ के अपराधी के खिलाफ एक भी सबूत नहीं ये बात गले नहीं उतरती..
वैसे भी हसन अली का अहमद पटेल जी से सम्बन्ध जगजाहिर है... और अहमद पटेल जी १० जनपथ में क्या हैसियत रखतें है ये भी सब जानते है...तो काले धन का रास्ता क्या इस तरीके से है...
१० जनपथ(इटली)---अहमद पटेल----हसन अली -स्विस बैंक ...
इसी कारण प्रशसन भी हसन अली पर हाथ खड़े कर रहा है...और हमारी हिजड़ी व नामर्द केंद्र सरकार आँखे मुंड रही है १० जनपथ के आशीर्वाद पाने के लिए...यहाँ एक बार में इस देश के सरे हिजड़ों से माफ़ी मांगता हूँ क्युकी हिजड़ो से कांग्रेस सरकार की तुलना करना हिजड़ों का तो अपमान है...क्यूकी हिजड़ो के घर में लूट मचाने के बाद वो तो चुप नहीं बैठेंगे..लेकिन ये सरकार कह रही है की लूटो लूटो इटली की मलिका और बीके हुए मीडिया के दलाल तुम्हारे साथ है...तो अब इस सरकार के लिए एक नया शब्द खोजना पड़ेगा जो कम से हिजड़ों की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुचता हो..
में समझता हूँ जब तक इटली के हाथों बिकी हुए सरकार के हाथों में देश का नियंत्रण रहेगा कला धन वापस आना दूर की बात हसन अली जैसे देशद्रोहियों को सरकारी अतिथि का दर्जा मिलता रहेगा...

याचन नहीं अब रण होगा
जीवन जय या की मरण होगा

महिला दिवस और महिला उत्थान का अभिप्राय

पिछला हफ्ता महिला दिवस के नाम रहा...

ढेर सारे ब्लॉग पर महिला शसक्तीकरण के बारें में अनेको लेख लिखे गए..कवितायेँ की गयी..सेमिनार किये गए..
मगर क्या इन सब से कुछ होने वाला है?? क्या महिला को अधिकार व आजादी मिलने वाली है?? क्या एक महिला के तरफ हमारा विचार बदलने वाला है...मेरे समझ से हम महिला दिवस मनाकर ही हम महिलाओ को ये एहसास दिला देतें है की आप दबी कुचली हैं और हम कुछ टुकड़े फेक कर आप को ऊपर उठा रहें है...मुझे याद नहीं कभी पुरुष दिवस मनाया गया हो..
महिला उत्थान या महिला आजादी से क्या अभिप्राय है?? उनका संसद में और नौकरियों में कोटा बना कर उत्थान किया जाए...उनके लिए बस स्टैंड और रेलवे में अलग काउंटर बना दें..मतलब वो सबसे अलग रक्खी जाएँ...
दूसरे शब्दों में हम मान लेते हैं की महिला अपने बल पर न तो टिकट खरीद सकती है न ही चुनाव जीत सकती है...और हम ये भी कहतें है की महिलाएं कुछ भी कर सकती है..चाँद पर जा रही है..डाक्टर बन रही है इत्यादि इत्यादि.ये दोगला चरित्र हम क्यों दिखा रहे है..हर साल महिला दिवस मनाया,२-४ लेख लिखा और हो गया कर्तव्यों की इतिश्री..
मैं एक दो बाते और साझा करना चाहूँगा ये सर्वविदित है की महिला सदियों से दबी कुचली रही है..अधिकार के मामलें में एक लम्बी शुन्यता देखी महिला ने..
मै महिलाओं के पुरे सम्मान के साथ कहना चाहूँगा जिसे पुरुषो के इस समाज में सदियों से अधिकार मिले ही नहीं तो वो इनका इस्तेमाल अचानक मिल जाने पर कैसे कर पाएंगी.. अगर रात को सोते समय हमारा कोई हाथ या पैर दब जाता है तो सुबह उसे सीधा करने में थोडा समय लगता है...
वैसे ही महिलाओं को सम्पूर्ण अधिकार को धनात्मक रूप से इस्तेमाल करने में कुछ समय लगेगा...इसलिए अधिकारों का स्थानांतरण नियंत्रित होना चाहिए... मेरे समझ से ये बेवकूफी भरा महिला दिवस का प्रदर्शन न करने के बजाय पूरे साल उन्हें नियंत्रित रूप से धीरे धीरे अधिकारों का स्थानांतरण करे..मैं बार बार नियंत्रित शब्द इसलिए इस्तेमाल कर रहा हूँ क्युकी अगर पिजड़े में कई साल से बंद चिड़िया को अचानक स्वछंद व्योम में उड़ने का अधिकार दे दें तो वो अपने पंखो को घायल कर किसी बाज या कुत्ते का शिकार हो जाती है...


अभी किसी ब्लॉग पर एक महिला ब्लोगेर ने लिखा था हमें क्या अपने पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार नहीं है...मेरी बहन पसंद के कपडे पहनने और नंगा नाचने में अंतर होता है..आज कल की कई महिलाएं भी अपने अधिकार का इस्तेमाल कपड़ों में ही करना चाहती है..वो भी कम से कम पहन कर...मानव की उत्पत्ति काल से पुरुष की दृष्टी में महिला का भूगोल और वक्र ही रहा है...ये एक कटु सत्य है मगर शायद कुछ बुद्धिजीवी न माने भले ही बंद कमरे में FTV देखते मिले..
अब अगर अधिकार की बात कर रहें है तो १ अधिकार के साथ १०० कर्तव्य जुड़े होतें है..महिलाये सदियों से कर्तव्यपरायण रही है तो ज्यादा कहना न होगा की आप के चाल ढाल बात या व्यक्तित्व में अधिकारों के साथ सामाजिक कर्तव्यों का भी समावेश होना चाहिए.
अब इसे समाप्त करते हुए कहना चाहूँगा की अगर आज कल के नेता समाजसेवी या लेखक महिला शसक्तीकरण का उदाहरण लेना चाहें तो राजा राममोहन राय को याद करें जिन्होंने सती प्रथा बंद करा कर महिला का असली उत्थान किया था न की उन्होंने आज की तरह महिलाओं को अर्धनग्न घुमने का अधिकार देने के लिए कोई लेख या कांफ्रेंस की थी.....